सिख बंदियों की रिहाई के लिए कौमी इंसाफ मोर्चा के लगाए गए धरने को हटाने में नाकाम पंजाब सरकार ने सोमवार को इस मामले को दो राज्यों के बीच का बताते हुए केंद्र सरकार के दखल को जरूरी बताया है। पंजाब सरकार के निवेदन पर हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को पक्ष बनाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
सोमवार को मामले की सुनवाई आरंभ होते ही अराइव सेफ सोसायटी की ओर से हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि आठ माह बीत जाने के बावजूद पंजाब सरकार व यूटी प्रशासन प्रदर्शनकारियों को धरनास्थल से हटाने में नाकाम रहे हैं। वाईपीएस चौक से केवल एक तरफ का रास्ता खुलवाया गया है और इसी पर दोनों तरफ का ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया कि प्रदर्शनकारियों की संख्या बहुत कम होने के बावजूद उन्हें हटाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों के पास हथियार मौजूद हैं लेकिन उन्हें भी लेने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। इस दौरान पंजाब सरकार ने कहा कि प्रदर्शनकारियों से बातचीत की जा रही है। पंजाब सरकार के स्तर पर किए गए प्रयासों के चलते 80 प्रतिशत प्रदर्शनकारियों को हटाया जा चुका है। बाकी का हिस्सा यूटी प्रशासन के अधीन आता है। यह विवाद दो राज्यों के बीच का है और ऐसे में इसमें केंद्र सरकार को पक्ष बनाना जरूरी है। ऐसे में पंजाब सरकार के निवेदन को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय को पक्ष बनाते हुए नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।