संगरूर के दिड़बा कस्बे को फास्टेस्ट मूवर्स का खिताब मिला है, इसकी जोनल रैंकिंग एक साल में 774 से 115 पर पहुंच गई। यहां सारे बाजारों में ट्विन-बिन की सुविधा है। 280 लोगों का फीडबैक लिया गया, जिनका मानना था कि एक साल में सफाई में काफी सुधार हुआ है। लोग कूड़ेदान का प्रयोग कर रहे हैं, शौचालय साफ मिले। 80 फीसदी से ज्यादा रिहायशी और व्यापारिक इलाका सौ प्रतिशत साफ मिला।
जीरा के सिर बंधा सेहरा
फिरोजपुर जिले के जीरा कस्बे को 25-50 हजार आबादी वाले शहरों में सिटीजन फीडबैक में बेस्ट माना गया है। यहां की 36732 आबादी 16 वार्डों में रहती है। सभी को पता था कि शहर सर्वे में हिस्सा ले रहा है और वे सफाई से संतुष्ट थे। 99.74 फीसदी ने कहा कूड़ेदान आसानी से मिल जाते हैं, 99.47 ने कहा बाजारों में यूरिनल हैं। 98.50 प्रतिशत रिहायशी और व्यापारिक इलाका साफ मिला। 1453 लोगों ने स्वच्छता एप डाउनलोड किया था।
जालंधर जिले की भोगपुर नगर पंचायत की जोनल रैंकिंग पिछले साल की 514 से बढ़ कर 123 हो गई। यहां 3802 घर हैं और 99 प्रतिशत लोग जानते थे कि पंचायत सर्वेक्षण में हिस्सा ले रही है। लोग सफाई और शौचालयों की स्थिति से संतुष्ट थे। 99.5 फीसदी ने कहा कि बाजारों में कूड़ेदान और यूरिनल हैं। 83 प्रतिशत रिहायशी और व्यापारिक इलाका साफ मिला।
भाई रूपा की खाद की हर तरफ डिमांड
बठिंडा जिले की रामपुरा फूल सब-डिवीजन की भाई रूपा नगर पंचायत को 25000 से कम आबादी वाले शहरों में इनोवेशंस और बेस्ट प्रैक्टिस के लिए खिताब मिला है। यहां लोगों को डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन और कूड़े को अलग करने के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए खास कैंपेन चलाया गया। गीले कूड़े से खाद बनाने और सूखे कूड़े को री-साइकिल करने के बारे में बताने को वर्कशॉप आयोजित की गई।
सारे शहर का गीला कूड़ा एक जगह इकट्ठा किया जाता है। फिर सारे वार्डों से इकट्ठा किया गया गोबर इस पर डाला जाता है। 90 दिन में इसकी बेहतरीन खाद तैयार हो जाती है। आसपास के किसानों में भाई रूपा की खाद की डिमांड बढ़ रही है।