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एसिड अटैक पीड़ित पुरुषों को मासिक सहायता से पंजाब का इनकार, हरियाणा में लड़कों को किया गया शामिल

Sat, 03 Nov 2018 12:18 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
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एसिड अटैक पीड़ितों को मासिक सहायता देने के लिए बनाई गई नीति में लड़कों को शामिल करने से पंजाब सरकार ने इनकार कर दिया है। हरियाणा सरकार ने अपनी नीति में प्रावधान किया है कि 18 वर्ष तक के लड़के और लड़कियां एसिड अटैक की स्थिति में 8 हजार रुपये मासिक सहायता के हकदार हैं। हाईकोर्ट ने दोनों सरकार के जवाब रिकार्ड पर लेकर सुनवाई 15 दिसंबर तक स्थगित कर दी।

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इससे पहले याचिका दाखिल करते हुए एसिड अटैक पीड़ितों को आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने इसके लिए आदेश भी जारी कर दिए लेकिन इनका पालन न होने पर अब अवमानना याचिका दाखिल की गई। अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान एसिड अटैक पीड़ित पुरूषों को भी मासिक आर्थिक सहायता दिए जाने की अपील की गई थी। याचिका पर हाईकोर्ट ने महिलाओं के लिए बनाई गई स्कीम में मुआवजे और आर्थिक सहायता को केवल महिलाओं तक सीमित रखने और पुरुषों को इसका लाभ न देने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हयिाणा व पंजाब सरकार को फटकार लगाई थी और दोनों से जवाब मांगा था।

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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट मे बताया गया कि दोनो राज्यों ने पीड़ितों के लिए पॉलिसी बना ली है। इसपर हाईकोर्ट ने देखा कि पॉलिसी केवल महिलाओं के लिए है और पुरुष इसमें कवर नहीं होते। पंजाब सरकार ने बताया कि यह पॉलिसी उन्होंने केवल महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाई है और पुरूष चाहे तो दिव्यांग पेंशन ले सकते हैं।

वहीं हरियाणा सरकार ने अपनी पॉलिसी को 18 साल तक के लड़के और लड़कियों को मासिक आर्थिक सहायता देने तक सीमित रखा है। याची ने कहा कि कैसे लिंग के आधार पर पीड़ित के साथ भेदभाव किया जा सकता है। वहीं पीड़ित की आयु के आधार पर उससे भेद-भाव करने को भी गलत बताया। हाईकोर्ट ने याची की दलीले सुनने और दोनों हलफनामों को रिकार्ड पर लेते हुए सुनवाई स्थगित कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि तेजाब का हमला बेहद खतरनाक होता है और यह जलाते हुए लिंग नहीं देखता। ऐसे में चाहे पुरुष हो या महिला वे अपनी आगे की जिंदगी बड़ी मुश्किल से बीता पाते हैं।
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