देशभर में जिस क्रिकेट को धर्म की तरह माना जाता है उसी क्रिकेट को पंजाब लोक सेवा आयोग ने खेल मानने से भी इनकार कर दिया है। पीपीएससी की दलील है कि ग्रुप ए और बी की नौकरियों में खेल कोटा में क्रिकेटरों को इसलिए मौका नहीं दिया जा सकता, क्योंकि क्रिकेट को खेल के तौर पर भारतीय ओलंपिक संघ से मान्यता नहीं है।
याचिका दाखिल करते हुए जसविंदर सिंह ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब लोक सेवा आयोग ने 2020 की संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से 75 पदों के लिए आवेदन मांगे थे। याची ने बताया कि वह एक क्रिकेटर है और उसे बीसीसीआई की ओर से प्रमाण पत्र भी जारी किया गया है। ऐसे में उसने खेल कोटा के दो पदों के लिए आवेदन किया और परीक्षा में भाग लिया। जब पीपीएससी ने परिणाम घोषित किया तो उसका परिणाम सामान्य श्रेणी के तहत घोषित किया गया। जबकि उसे खेल कोटा में रख कर परिणाम घोषित करना चाहिए था।
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पीपीएससी के इस निर्णय को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका पर अपना जवाब देते हुए पीपीएससी ने कहा कि क्रिकेट खिलाड़ियों को पंजाब रिक्रूटमेंट ऑफ स्पोर्ट्समैन रूल्स 2020 के तहत खेल कोटा में स्थान नहीं दिया जा सकता। पीपीएससी की दलील रही कि बेहतरीन खिलाड़ियों को खेल कोटा के तहत सरकार नौकरी देती है और इसकी शर्त के अनुसार खेल का आयोजन भारतीय ओलंपिक संघ से मान्यता प्राप्त या संबंधित राष्ट्रीय खेल महासंघ द्वारा होना चाहिए। भारत में क्रिकेट भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा नियंत्रित किया जाता है और यह बोर्ड भारतीय ओलंपिक संघ द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है। ऐसे में याची के नाम पर खेल कोटा के तहत विचार किया ही नहीं जा सकता।
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