पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियां जोड़-तोड़ में जुटी हैं। अकाली दल के अध्यक्ष बादल ने पीएम मोदी से मुलाकात की है। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भाजपा नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह की तारीफ की है।
पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी नफे के लिए शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और कांग्रेस दोनों ही जोड़-तोड़ की सियासत में जुट गई हैं। अकाली दल के अध्यक्ष बादल शुक्रवार को पीएम मोदी से मिलते हैं और दूसरी ओर राहुल गांधी फिर से भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की तारीफ करते हैं।
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सूबे की सियासत में इन दोनों राजनीतिक घटनाक्रम के बड़े सियासी मायने हैं। जिसके चलते विभिन्न राजनीतिक दलों खासी हलचल का माहौल है। दरअसल, अकाली दल और भाजपा के बीच रिश्तों की गरमाहट बहुत पुरानी है मगर किसान आंदोलन (साल 2020) की आंच में यह रिश्ता झुलस गया था। उस वक्त शिअद की प्राथमिकताएं अलग थीं।
अकाली दल को साल 2022 का विधानसभा चुनाव दिख रहा था। चूंकि इस आंदोलन की अगुवाई पंजाब की किसान जत्थेबंदियां ही कर रही थीं, लिहाजा अकाली नेताओं को अंदेशा था कि इसका नकारात्मक असर आगामी चुनाव में पड़ सकता है।
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किसान जत्थेबंदियां भी लगातार अकाली नेताओं पर दबाव बना रही थी कि वे केंद्र सरकार से बातचीत कर तीनों कृषि कानूनों को वापस करवाए और साथ में पार्टी का रूख भी स्पष्ट किया जाए। इस पर बड़ा दांव खेलते हुए शिअद के कोटे से केंद्र में मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और इसके बाद अकाली दल ने किसानों को खुला समर्थन देने का भी एलान कर दिया था। इस तरह भाजपा और शिअद की सियासी राहें करीब 25 साल बाद जुदा हो थीं।
हालांकि इस गठबंधन ने पंजाब में तीन बार साल 1997, 2007 व 2012 में अपनी सरकार बनाई थी मगर साल 2022 का विधानसभा चुनाव और साल 2024 का लोकसभा चुनाव दोनों दलों ने अलग-अलग लड़ा। नतीजा यह रहा कि दोनों दलों भारी सियासी नुकसान झेलना पड़ा। अब साल 2027 के चुनाव नजदीक आते ही अकाली दल एक बार फिर से भाजपा संग अपनी नजदीकियां बढ़ा रहा है। जिसके बाद दोनों पार्टियां में एक बार फिर से गठबंधन की अटकलें तेज हैं।
कांग्रेस और आप के लिए चिंता क्यों?
अकाली दल और भाजपा की बढ़ती नजदीकियां सूबे में कांग्रेस और आप के लिए बड़ी का चिंता का विषय बन सकती है क्योंकि अकाली और भाजपा का गठबंधन यदि होता है तो यह सूबे में एक बड़ी सियासी चुनौती के रूप में उभरेगा। अभी तक आम आदमी पार्टी प्रदेश में किसी से अपना मुकाबला नहीं मान रही है जबकि कांग्रेस का दावा है कि वे इस बार आप को कड़ी चुनौती देगी। ऐसे में अकाली दल और भाजपा का गठबंधन हो जाता है तो आप व कांग्रेस के समीकरण बिगड़ सकते हैं। पूर्व में संयुक्त रणनीति के तहत अकाली दल ग्रामीण और पंथक वोट पर जबकि भाजपा शहरी और हिंदू वोट पर फोकस कर अपनी सरकारें बनाती रही हैं।
राहुल क्या चाहते हैं?
पंजाब कांग्रेस में इस वक्त बगावत चल रही है। बडे़ नेताओं में खासा मतभेद है। जिसने पार्टी हाईकमान की चिंताएं बढ़ा रखी हैं। अब पार्टी की अंदरूनी खींचतान के बीच अचानक राहुल गांधी ने भाजपाई बन चुके पूर्व कांग्रेसी कैप्टन अमरिंदर सिंह की तारीफ कर अपनी पार्टी के नेताओं में ही खलबली पैदा कर दी है। राजनीतिक मामलों के जानकार मलकीत सिंह कहते हैं कि कैप्टन की तारीफ कर राहुल अपने नेताओं को कूटनीतिक संदेश देना चाहते हैं क्योंकि जो नेता इस वक्त बागी बने हुए हैं, उनमें से अधिकतर कैप्टन के भी खिलाफ थे। जिसके चलते कांग्रेस ने सीएम पद पर रहते हुए कैप्टन अमरिंदर को पद से हटा दिया था, जिसके बाद वे भाजपा में चले गए थे।