बरगाड़ी बेअदबी मामले में जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की सिफारिश पर गठित पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम ने बहिबल गोलीकांड के पीड़ितों और गवाहों के बयान दर्ज किए। एसआईटी के सदस्य और एसएसपी कपूरथला सतिंदर सिंह की अगुवाई में बरगाड़ी पहुंची जांच टीम के पास गोलीकांड में शहीद गुरजीत सिंह सरावां के पिता साधू सिंह समेत करीब 20 लोगों ने अपने बयान दर्ज करवाए।
जानकारी के अनुसार, पंजाब सरकार ने पिछले माह ही बरगाड़ी बेअदबी मामले से संबंधित बहिबल कलां और कोटकपूरा गोलीकांड की जांच के लिए एडीजीपी प्रबोध कुमार की अध्यक्षता में विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी की तरफ से इन दोनों घटनाओं से संबंधित थाना बाजाखाना और थाना सिटी कोटकपूरा में दर्ज चार एफआईआर की जांच की जानी है। एसआईटी ने चार दिन पहले फरीदकोट पहुंच कर जांच का काम शुरू कर दिया था।
इन दोनों घटनास्थलों का जायजा लेने के बाद मंगलवार को घटनाओं से जुड़े पीड़ित व्यक्तियों व गवाहों के बयान लिखने का काम भी शुरू कर दिया। एसआईटी ने जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट के आधार पर 51 गवाहों को बयान दर्ज करवाने के लिए बरगाड़ी पुलिस चौकी में बुलाया हुआ था लेकिन 20 अन्य लोग भी अपना बयान दर्ज करवाने पहुंचे। एसआईटी ने पहले दिन एक महिला समेत करीब 20 लोगों के बयान लिखे जबकि बाकियों के बयान बुधवार को लिखे जाएगें।
बहिबल गोलीकांड में शहीद गुरजीत सिंह सरावां के पिता साधू सिंह समेत अन्य पीड़ित व गवाहों ने बताया कि 14 अक्तूबर 2015 को बहिबल कलां में बरगाड़ी बेअदबी मामले के विरोध में शांतिपूर्वक धरना दिया जा रहा था। इसी दौरान एसएसपी मोगा चरनजीत सिंह शर्मा की अगुवाई में पहुंचे पुलिस अधिकारियों व कर्मियों ने बिना किसी चेतावनी के ही धरनाकारियों पर बल उपयोग करना शुरू कर दिया और पुलिस के अंधाधुंध फायरिंग करने से नियामीवाला के किशन भगवान सिंह व सरावां के गुरजीत सिंह की मौत गई और कई गंभीर रूप से घायल हो गए।
इस दौरान कोटकपूरा की घटना से संबंधित पीड़ित व्यक्ति भी बरगाड़ी पहुंचे जिन्हें एसआईटी ने वीरवार को फरीदकोट कैंप आफिस बुलाया। शहीद गुरजीत के पिता साधू सिंह ने कहा कि वह पिछले तीन साल के दौरान कई बार अपना बयान दर्ज करवा चुके हैं लेकिन फिर भी वह नई उम्मीद के साथ नई एसआईटी के पास आए हैं। एसआई के सदस्य और एसएसपी कपूरथला सतिंदर सिंह ने कहा कि एसआईटी ने बहिबल कांड से संबंधित करीब 50 गवाहों को बुलाया है। साथ ही इन घटनाओं के बारे में संबंधित कोई भी व्यक्ति उनके फरीदकोट रेस्ट हाउस में बनाए कैंप आफिस में आकर अपने बयान दे सकता है।