पंजाब पुलिस कानून व्यवस्था की ताजा चुनौतियों से निपटने के लिए डिजिटलाइजेशन के मैदान में कूद गई है। इसके तहत सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपराध व अपराधियों के सुराग लगाने के लिए क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) की शुरुआत की।
सीसीटीएन ‘गो लाइव’ से राज्य में एफआईआर और जनरल डायरी का सारा काम बिना पेपरलेस होने का रास्ता साफ हो गया है। इसे अब पुलिस कर्मचारियों द्वारा ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा। इसके लिए उन्हें टैबलेट मुहैया करवाए जाएंगे। इस पहलकदमी के लिए पुलिस को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पंजाब अब उन कुछेक राज्यों में शामिल हो जाएगा, जो देश में इसका प्रयोग करते हैं।
13 वर्ष पुराना डाटा (एफआईआर और जनरल डायरी) का पहले ही इस प्रोजेक्ट के हिस्से के तौर पर डिजिटलीकरण कर दिया है और भविष्य में संपूर्ण डाटा अब लाइव अपलोड किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों से इस प्रोजेक्ट के जरिए उपलब्ध बहुमूल्य सूचनाओं के भंडार को प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने को कहा। उन्होंने सभी स्तरों पर सूचना प्रौद्योगिकी की कुशलता को बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया है ताकि ऐसे प्रोजेक्टों को लाभदायक बनाया जा सके।
प्रोजेक्ट के लिए 47 करोड़ में 22.64 करोड़ खर्च
Captain Amarinder Singh
मुख्यमंत्री ने पुलिस स्टेशन और निगरानी स्तर के सभी पुलिस अधिकारियों को इस प्रोजेक्ट पर कार्य करने को कहा है। उन्होंने सीसीटीएनएस के जरिए सफलता प्राप्त करने वालों को उचित सम्मान देने के लिए भी निर्देश दिए। इससे बहुत सादे ढंग से पुलिस स्टेशन स्तर पर रिकार्ड रखा जाएगा। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत के अवसर पर पंजाब पुलिस के डीजीपी सुरेश अरोड़ा, डीजीपी (आईटी एंड टी) वीके भावरा, डीजीपी इंटेलिजेंस दिनकर गुप्ता, डीजीपी कानून व्यवस्था हरदीप ढिल्लों, आईजी प्रोविज़निंग गुरप्रीत दियो, आईजी क्त्रसइम इन्दरवीर सिंह, आईजीपी (आईटी) एसके अस्थाना, आईजी (एनआरआई सेल) ईशवर चंद्र, मुख्य मंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव तेजवीर सिंह उपस्थित थे ।
प्रोजेक्ट के लिए 47 करोड़ में 22.64 करोड़ खर्च
डीजीपी सुरेश अरोड़ा के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र द्वारा 47 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इनमें से 22.64 करोड़ रुपये खर्च हो जा चुके हैं। प्रोजेक्ट के अधीन इस समय 600 स्थान चुने गए हैं। इनमें 400 पुलिस थाने और सब-डिवीजऩ से लेकर राज्यस्तर तक के कार्यालय हैं। इस समय 13 वर्ष (2005 से 2017) तक का डाटा इस पर उपलब्ध है जिस में करीब 7.6 लाख एफआईआर के अलावा विभिन्न तरह की जांच के साथ संबंधित कुल 29 लाख रिकार्ड हैं, जिन्हें आनलाइन देखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि एफआईआर दाख़िल होने से यह डाटा रोज बढ़ता जाएगा।
512 केवी कनेक्शन से जुड़ेंगे पुलिस थाने
डीजीपी ने बताया कि पुलिस थानों को 512 केवी कनेक्शनों से जोड़ा गया है। इस वर्ष जून -जुलाई तक ऑप्टिक फाइबर से स्तर ऊंचा उठाने का भी प्रस्ताव है। यह कार्य 22 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा, जिसके लिए 12 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। सभी स्थानों को कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर मुहैया करवाए गए हैं और इन्हें डाटाबेस के नियमित अपलोड करने के लिए डिजिटल तौर पर जोड़ा गया है। सभी एफआईआर रजिस्टर की जा रही हैं और सभी जनरल डायरी एंटरियां सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट के अधीन कंप्यूटर पर की जा रही हैं।