पंचायत जमीन पर कब्जा लेते वक्त राजस्व अभिलेख को दिखाते मंत्री कुलदीप धालीवाल।
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पंजाब सरकार द्वारा पंचायती जमीनों से अवैध कब्जे हटाने का मामला अब अदालत में पहुंच गया। मुल्लांपुर स्थित गांव अभिपुर की जिस जमीन से कब्जे हटाने की मुहिम शुरू की गई थी, उसके मालिक पूर्व कैप्टन बिक्रमजीत सिंह ने इसे खरड़ अदालत में चुनौती दी है। उन्होंने इसे कंटेप्ट ऑफ कोर्ट माना है। इस मामले में अदालत ने पंचायत मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल को 25 जुलाई को पेश होने के आदेश दिया है।
जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार ने सरकारी जमीनों पर हुए अवैध कब्जे हटाने की मुहिम 28 अप्रैल को अभिपुर से शुरू की थी। इस दौरान कैप्टन बिक्रमजीत सिंह की जमीन से कब्जा छुड़ाया गया था। हालांकि कैप्टन ने उस दौरान कहा था कि इस जमीन पर अवैध कब्जा नहीं है बल्कि उन्होंने जमीन खरीदी है।
इस संबंधी उनके पास बाकायदा दस्तावेज हैं जबकि जमीन संबंधी मामला अदालत में लंबित है। ऐसे में उन्होंने इस कार्रवाई को अदालत के नियमों के खिलाफ बताया था। साथ ही इस संबंधी खरड़ अदालत की शरण ली थी। इस पर अदालत ने सुनवाई करते हुए इस दिशा में आदेश दिए हैं।
मंत्री धालीवाल ने 28 अप्रैल को छुड़वाया था 29 एकड़ जमीन पर से कब्जा
बता दें कि 28 अप्रैल को मीडिया के साथ मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल अभिपुर पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने सेवामुक्त कैप्टन की 29 एकड़ जमीन से कब्जा छुड़ाया। साथ ही कहा था कि जमीन पर 2007 से अवैध कब्जा था। यह जमीन पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के सिसवां फार्म हाउस और अकाली प्रधान सुखबीर बादल के होटल सुख विलास के नजदीक है।
कई गांवों में हो रहा है सरकार की मुहिम का विरोध
सरकार द्वारा पंचायती जमीनों से अवैध कब्जे हटाने की मुहिम का मुल्लांपुर समेत दर्जनों गांवों मे विरोध हो रहा है। यह मामला सरकार के ध्यान में है। क्योंकि एक जून का राजस्व विभाग द्वारा तीन हजार छह सौ तीन एकड़ जमीन की मलकीयत हिस्सेदारों के नाम से हटाकर पंचायत के नाम की थी। तब से ही सरकार के इस फैसले का विरोध हो रहा है। यहां तक की 10 जून को लोगों ने इस मामले में डीसी से मुलाकात की थी। साथ ही कहा था कि आजादी से पहले जमीने उनके नाम पर चल रही है। सरकार उनके साथ धक्केशाही कर रही है। जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा रहा है।