1980 में भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक में गोल्ड मेडल हासिल किया था। इसमें पंजाब के सुरिंदर सिंह सोढी ने सबसे अधिक गोल कर रिकॉर्ड कायम किया था। 1956 में ऊधम सिंह ने 15 गोल दागे थे और सुरिंदर सोढी ने 1980 में ओलंपिक में 15 गोल दागकर रिकॉर्ड बराबर किया था। अब सोढी पंजाब के आईजी पद से रिटायर होकर गुमनाम जिंदगी जी रहे हैं।
वह बताते हैं कि एक बार दिल्ली में इंदिरा गांधी गोल्ड कप का आयोजन किया गया था और केंद्रीय खेल मंत्रालय ने तमाम ओलंपियन का सम्मान करने के लिए बुलाया था। हमें अलग सीटों पर बैठाया गया जो स्टेडियम से दूर थीं। जब तत्कालीन पीएम पीवी नरसिम्हा राव वहां पहुंचे तो खुद हमें आकर मिले और कहा कि आप देश के रोल मॉडल हैं। इसलिए मैं खुद चलकर आपसे मिलने आ रहा हूं। यही रोल मॉडल अब घरों में बैठे हुए हैं, उन्हें किसी सरकारी समारोह में नहीं बुलाया जाता।
किसी भी जिले के डीसी को इतना पूछ लो कि आपके जिले में कितने ओलंपियन है तो वह उत्तर नहीं दे पाएगा। जब गेम्स के हीरो की हालत यह है तो युवाओं में क्या क्रेज पैदा होगा। वैसे पंजाब में अब इंफ्रास्ट्रकचर, नए कोच की कमी है। कई छोटे-छोटे देशों में 300 एस्टर्फ हैं लेकिन भारत में गिनती के होंगे। जमीनी हकीकत यह है कि नशे को सिर्फ खेल खत्म कर सकता है। खेलों में मैदान फतेह कर चुके लोगों को स्कूलों में विजिट करवाना चाहिए, बच्चों में उत्सुकता पैदा होगी तो वह खुद खेल की तरफ आकर्षित होंगे।
एक जुराब का टेंडर तक नहीं किया सरकार ने, खेलों में कैसे बढ़ेगा पंजाब
हॉकी खिलाड़ी और कांग्रेस विधायक पद्मश्री परगट सिंह का कहना है कि मौजूदा सरकार ने एक जुराब तक का टेंडर नहीं किया है तो हम खेलों में कैसे उठ सकते हैं? सरकार खेल खिलाड़ियों के प्रति उदासीन है। यही वजह है कि पंजाब अब खेलों में काफी पिछड़ चुका है। मैदानों की कमी है। इसलिए बच्चों के रोल मॉडल अब खिलाड़ी नहीं बल्कि बंदूक-गंडासी की बात करने वाले गायक हैं। यह पंजाब की असली तस्वीर है। बेशक मैं सत्ताधारी पार्टी से हूं लेकिन विधानसभा में भी मैंने साफ कहा था कि पंजाब में खेल और खिलाड़ियों की हालत बदतर हो चुकी है। इसी कारण आज हरियाणा पंजाब से आगे निकल चुका है।