आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्लानी को अगवा करने व हत्या के 29 साल पुराने मामले में फरार चल रहे पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अगवा करने के मामले में पहले मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ सरकार ने जिला अदालत में याचिका दायर कर दी है। इसकी सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला सेशन जज ने नोटिस जारी कर पूर्व डीजीपी से जवाब तलब किया है। अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
अदालत ने सुमेध सिंह सैनी के वकील को 17 सितंबर तक सैनी का वकालतनामा पेश करने के आदेश दिए हैं। इससे पहले पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी की तरफ से केस में हत्या की धारा जुड़ने पर जिला अदालत में जमानत याचिका दायर की गई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।
दूसरी तरफ, केस में सैनी के साथ आरोपी चंडीगढ़ के पूर्व पुलिस मुलाजिम जागीर सिंह व कुलदीप सिंह सरकारी गवाह बन चुके हैं। उन्होंने अदालत में 164 के बयान दर्ज करवाए थे, जिसमें उन्होंने इस सारी घटना के लिए सैनी को जिम्मेदार ठहराया था। इसके अलावा गवाह राजा, गुरमीत सिंह पिंकी कैट व एक वकील ने भी अदालत में बयान दर्ज करवाए हैं।
गिरफ्तारी से बचने के लिए सैनी हुए भूमिगत
हत्या की धारा जुड़ने और पुलिसकर्मियों के सरकारी गवाह बनने के बाद ही साफ हो गया था कि सैनी की गिरफ्तारी तय है। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, पंजाब में दबिश दे रही हैं। लेकिन वह अभी तक हाथ नहीं लगे हैं।
29 साल पुराना है मामला
1991 में जब सुमेध सिंह सैनी चंडीगढ़ के एसएसपी थे, तब उन पर आतंकी हमला हुआ था। इसमें उनके तीन सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। आरोप है कि इस हमले के बाद सैनी ने मोहाली से वरिष्ठ आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी को जबरदस्ती उठाया था। इसके बाद से उसका कुछ पता नहीं चला था। पहले यह केस सुप्रीम कोर्ट तक जा चुका है, जिसमें सैनी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। वहीं, अब दोबारा केस दर्ज हुआ है जबकि सैनी इस केस को राजनीति से प्रेरित बताते हैं।
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