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18 दिन बीते मकानों की कीमत तय नहीं कर पाया हाउसिंग बोर्ड, केंद्रीय गृह सचिव के साथ हुई बैठक में प्रशासन ने 10 दिन का लिया था समय

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चंडीगढ़। 18 दिन बीतने के बाद भी प्रशासन यूटी कर्मचारियों को मकान देने के लिए सभी वर्गों के फ्लैट्स की कीमत को नए सिरे से तय नहीं कर पाया है। 19 अगस्त को केंद्रीय गृह सचिव के साथ प्रशासन के अधिकारियों की हुई बैठक में यूटी ने 10 दिन का समय मांगा था। देरी पर इंप्लाइज हाउसिंग वेल्फेयर सोसायटी के सदस्य काफी नाराज हैं। उनका कहना है कि प्रशासन की मकान देने की नीयत ही नहीं है।
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यूटी इंप्लाइज हाउसिंग वेल्फेयर सोसायटी के महासचिव डॉ. धर्मेंद्र ने कहा कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों के तहत केंद्रीय गृह सचिव, चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन के साथ याचिकाकर्ताओं की 19 अगस्त को बैठक हुई थी। इसमें यूटी इंप्लाइज के प्रतिनिधियों के सामने प्रशासन की तरफ से 11 मंजिला, 5 मंजिला फ्लैट्स या फिर केवल स्ट्रक्चर बनाकर देने जैसे तीन विकल्प रखे गए। इस पर केंद्रीय गृह सचिव ने सीएचबी के अधिकारियों को तुरंत निर्देश दिए कि वह सभी विकल्पों में जल्द से जल्द फ्लैटों के दाम इंप्लाइज को बताए जाएं, ताकि ये आपस में विचार विमर्श करके कुछ निर्णय ले सकें। प्रशासन ने इसके लिए 10 दिन का समय मांगा। डॉ. धर्मेंद्र ने बताया कि 18 दिन बीत जाने के बाद अभी तक सीएचबी मकान की कीमत को तय नहीं कर पाया है।
कीमतों में हुआ मामूली बदलाव
सूत्रों के अनुसार 11 मंजिला मकानों की गणना में ए कैटेगरी के एक फ्लैट की कीमत जो 1.76 करोड़ रुपये थी, वह अब 1.60 करोड़ के लगभग की गई है। इसी तरह बी कैटेगरी के फ्लैट की कीमत जो 1.35 करोड़ बताई गई थी अब 1.24 करोड़, सी कैटेगरी के फ्लैट की कीमत जो 99 लाख रुपये बताई गई थी, वह अब 75 लाख के लगभग और डी कैटेगरी के फ्लैट की कीमत जो 58 लाख रुपये बताई गई थी, वह अब 40 लाख के करीब बन रही है। सीएचबी के अधिकारी अभी पांच मंजिला फ्लैटों की कीमत तय नहीं कर पाए हैं। हाईकोर्ट में एक सितंबर को इस मामले की सुनवाई होनी थी, लेकिन अब दो दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई है। यही कारण है कि हाउसिंग बोर्ड भी काम में देरी कर रहा है।
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