कच्ची दारू पीने से ही कई लोगों व नौजवानों को मेडिकल नशे की लत लगी है। कच्ची दारू को अधिक नशीली बनाने के लिए इसमें नशीली गोलियां और ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन मिलाया जाता है। जानकारों के मुताबिक बहुत से नौजवान नशा करने के लिए ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाते हैं।
वहीं एक बार नशीली गोलियां डाली हुई कच्ची दारू कोई पी लेता है तो फिर उसे यही दारू अच्छी लगती है। इसलिए नशेड़ी शाम होते ही सीमांत गांवों व स्लम बस्तियों में नजर आते हैं। यही कारण है कि कुछ ही सालों में कच्ची दारू की मांग एकदम से बढ़ गई है।
पंजाब में बहुत से नौजवान मेडिकल नशा करने के अलावा हेरोइन व स्मैक का नशा करते हैं। अवैध शराब माफियों को मालूम है कि कच्ची दारू में मेडिकल नशा डाला जाए तो मांग बढ़ेगी, जिससे मुनाफा भी बहुत होगा। इसलिए कच्ची दारू में नशीले कैप्सूल और ऑक्सीटोसिन (भैंसों को लगाया जाने वाला) इंजेक्शन डाला जाता है। इसे पीने से काफी समय तक व्यक्ति नशे में रहता है, जबकि अंग्रेजी शराब पीने से कुछ समय बाद नशा टूट जाता है।
सीमांत गांव अलीके, चांदी वाला, बारेके, गट्टी राजोके, टिंडी वाला व भाने वाले के ग्रामीण बताते हैं कि कुछ सालों से शाम के वक्त महंगी बाइकों पर नौजवान गांवों में आते हैं। यहां पर कच्ची दारू का सेवन कर लौट जाते हैं। यही नहीं अपने साथ प्लास्टिक की बोतलों में भी कच्ची दारू भरकर साथ ले जाते हैं। पहले गांवों में कोई बाहरी व्यक्ति कच्ची दारू पीने नहीं आता था।