बहिबल गोलीकांड मामले में एसआईटी ने गुरुवार को जिला अदालत को जानकारी दी कि इस केस में तत्कालीन डीजीपी सैनी, आईजी परमराज सिंह उमरानंगल समेत राज्य के एक बड़े राजनेता भी मुख्य आरोपियों में शामिल हैं। गौरतलब है कि आईजी परमराज सिंह उमरानंगल कोटकपूरा गोलीकांड में भी नामजद हैं।
पूर्व आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के अपहरण व हत्या के मामले में गिरफ्तारी से बचते फिर रहे पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी की मुश्किलें इस केस ने और बढ़ा दी है। सैनी के कार्यकाल के दौरान ही 14 अक्तूबर 2015 को हुए इस मामले में पुलिस की गोली लगने से दो व्यक्तियों की मौत हो गई थी। बहिबल गोलीकांड केस में घटना के एक सप्ताह बाद अज्ञात पुलिस पार्टी पर हत्या का केस दर्ज हुआ था।
जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन एसएसपी मोगा चरणजीत सिंह शर्मा, उनके रीडर इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह, एसपी बिक्रमजीत सिंह और एसएचओ बाजाखाना अमरजीत सिंह कुलार को नामजद किया गया था। इनमें से अभी तक चरणजीत सिंह शर्मा की ही गिरफ्तारी हुई, जिनके खिलाफ अदालत में चालान भी पेश किया जा चुका है। बाकी तीनों अधिकारियों को हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिली हुई है। कुछ समय पहले ही एसआईटी ने इस केस में फरीदकोट निवासी सुहेल सिंह बराड़, मोगा निवासी पंकज बांसल समेत तत्कालीन एसएचओ गुरदीप सिंह पंधेर को भी गिरफ्तार किया था।
अगली सुनवाई 15 को
जिला अदालत में गुरुवार को बहिबल गोलीकांड केस में आरोपी इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह को वादा माफ गवाह बनाने को लेकर एसआईटी के आवेदन पर सुनवाई हुई थी। इसी दौरान एसआईटी के सदस्य आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने सैनी और उमरानंगल के नाम लिए। अब इस मामले में अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। आरोपी इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह के वकील जतिंदर सिंह खोसा ने कहा कि केस की पड़ताल जारी है, ऐसे में कोर्ट में पूर्व डीजीपी सैनी और आईजी उमरानंगल की भूमिका के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।