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पंजाबः सुनील जाखड़ पहुंचे कैप्टन के द्वार, निजी थर्मल प्लांटों पर ताला लगाने की मांग की

Sat, 08 Feb 2020 02:17 PM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सुनील जाखड़। - फोटो : फाइल फोटो
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महंगी बिजली के चलते निजी कंपनियों से समझौते रद्द करने के विपक्ष के दबाव के बीच, पंजाब के निजी थर्मल प्लांट अपनी ही लापरवाही से घिर गए हैं। प्रदूषण की रोकथाम के लिए सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) ने प्लांटों को 31 दिसंबर, 2019 तक प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाने की मोहलत दी थी, जिसे निजी प्लांट मालिकों ने अनदेखा कर दिया है। 

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इसकी जानकारी मिलते ही पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास पहुंच गए और उन्होंने कल सुबह ही निजी थर्मल प्लांटों पर ताला लगा देने की मांग कर दी। हालांकि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) निजी थर्मल प्लांटों को राहत दिलाने के लिए सीपीसीबी के द्वार पहुंच गया है और प्लांटों को उपकरण लगाने के लिए दो साल की मोहलत देने की मांग की है।

शुक्रवार को पंजाब भवन में कुछ चुनिंदा पत्रकारों से बातचीत में सुनील जाखड़ ने बताया कि उन्होंने सीएम से कहा है कि दोनों निजी थर्मल प्लांटों को कल से ही बंद कर दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार यह कदम उठाती है तो इससे सरकार को 4600 करोड़ रुपये बचेंगे, जिससे सरकार अन्य कंपनियों से सस्ती बिजली खरीद सकती है। 

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जाखड़ ने कहा कि इन निजी थर्मल प्लांटों को बंद करने से पंजाब को फायदा ही होगा और महंगे बिजली खरीद समझौतों से बाहर निकलने का मौका भी मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि उपकरण लगाने को लेकर मांगी गई मोहलत पर भी ध्यान दें तो अगले दो साल के लिए इन प्लांटों को बंद कर देने से सरकार को करोड़ों का फायदा होगा।

जाखड़ ने कहा कि इन निजी प्लांटों को बंद कर देने से जहां 4600 करोड़ रुपये की बचत होगी, वहीं कोल वाशिंग के तौर पर दिए जाने वाले 480 करोड़ रुपये भी अलग से बचेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्यमंत्री से यह मांग भी है कि निजी प्लांटों के लिए सीपीसीबी के समक्ष सरकार की तरफ से पैरवी न की जाए। उन्होंने बताया कि एक तरफ तो पीएसपीसीएल निजी थर्मल प्लांटों को नोटिस जारी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पीपीसीबी इन प्लांटो की पैरवी में जुटा है।

गौरतलब है कि निजी थर्मल प्लांटों को कोल वाशिंग के रूप में एक हजार करोड़ रुपये चुकाने के मामले में पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट में केस हार चुकी है, जिसे लेकर सुनील जाखड़ ने हाल ही में प्रदेश के एजी अतुल नंदा की सार्वजनिक तौर पर खिंचाई भी कर दी थी। जाखड़ ने इस मामले में एजी आफिस की भूमिका और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे।
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निजी थर्मल प्लांटों ने नहीं माना सीपीसीबी का आदेश

तलवंडी साबो और राजपुरा के निजी थर्मल प्लांटों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण उपकरण नहीं लगाने के चलते संबंधित इलाकों के लोगों को गंभीर बीमारियों का शिकार होना पड़ रहा है। कोयले से चलने वाले इन प्लांटों से काफी मात्रा में नाइट्रोजन गैस निकलती है। इसे गंभीरता से लेते हुए सीपीसीबी ने इन प्लांटों को प्रदूषण नियंत्रण संबंधी विशेष उपकरण लगाने के आदेश दिए थे। इन प्लांटों को 31 दिसंबर, 2019 तक यह उपकरण लगाने थे लेकिन प्लांट मालिकों ने ऐसा नहीं किया।

रद्द हो सकते हैं समझौते : जाखड़
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का यह बयान कि अकाली-भाजपा शासन के दौरान निजी थर्मल प्लांटों से हुए समझौते किसी भी स्थिति में रद्द नहीं किए जा सकते, के विपरीत शुक्रवार को सुनील जाखड़ ने कहा कि उन्होंने निजी कंपनियों से समझौते रद्द करने का एक प्लान तैयार कर लिया है और जल्दी ही इसे मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान के विपरीत यह भी कहा कि ऐसा कुछ नहीं है कि यह महंगे बिजली समझौते रद्द नहीं किए जा सकते। उन्होंने कहा कि समझौते रद्द करने से जहां संबंधित इलाकों के लोगों की सेहत अच्छी होगी, वहीं सरकार को वित्तीय लाभ भी होगा।
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