पटियाला सीट पर भाजपा से कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर को कांग्रेस के धर्मवीर गांधी और आप के मंत्री बलबीर सिंह की चुनौती होगी। शिरोमणि अकाली दल के हिंदू प्रत्याशी एनके शर्मा ने परनीत की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अंतिम चुनाव की दुहाई दी जा रही है।
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कभी पटियाला की सियासत राजघराने के इर्द-गिर्द घूमा करती थी लेकिन, 2022 में पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की हार के बाद राजघराने को अपनी सियासत के लिए रियासत में घर-घर दस्तक देनी पड़ रही है। प्रतिद्वंद्वी दलों ने कैप्टन को विधानसभा चुनाव में हराने के बाद रानी परनीत कौर की घेराबंदी के लिए जिस तरह चालें चली हैं, यहां का चुनावी संग्राम दिलचस्प हो गया है।
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पगड़ी, पेग और परांदा के लिए मशहूर पटियाला की खुली-चौड़ी सड़कें, हरे-भरे पार्क, हेरिटेज भवन और बड़ी-बड़ी बिल्डिंग शाही शान की गवाही देते हैं। महाराजा पटियाला के आलीशान निवास मोतीबाग पैलेस के पास एक कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड का काम कर रहे पूर्व फौजी जितेंदर सिंह कहते हैं कि महारानी कांग्रेस से लड़ती थीं।
इस बार भाजपा से आ गईं हैं, तो कांग्रेस की समस्या बढ़ गई है। कांग्रेस के पास उनके कद का दूसरा प्रत्याशी नहीं था, तो आम आदमी पार्टी से खफा होकर खुद की पार्टी बनाने वाले पूर्व सांसद धर्मवीर गांधी को ले आई। गांधी 2014 में परनीत को हरा चुके हैं, तो 2019 में उन्हीं से हारे भी।
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उधर, सत्तारूढ़ आप ने राजघराने की सियासत को उसकी चौखट में कैद करने की बात कहकर सेहत कल्याण मंत्री बलवीर सिंह को उतारा है। भाजपा व शिरोमणि अकाली दल (ब) में गठबंधन न होने से नाराज सुखबीर सिंह बादल ने ताकतवर हिंदू प्रत्याशी एनके शर्मा को उतारकर राजघराने की चुनौती बढ़ा दी है। यहां लड़ाई चौकोनी है, मगर सब लड़ेंगे महारानी से ही।
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पटियाला के शुतराना में मिले आढ़ती जितेंदर कुमार कहते हैं कि यहां 55-60% सिख और 40-45% हिंदू हैं। किसानों की मांगें न मानने से सिख भाजपा से नाराज हैं। लेकिन, हिंदू अयोध्या में राम मंदिर बनने से खुश हैं और बड़ा तबका भाजपा के लिए गोलबंदी कर रहा है। यदि महारानी 50% भी सिख वोट ला पाईं, तो बात बन सकती है। लेकिन, यह आसान नहीं है।
शिअद ने दो बार के विधायक एनके शर्मा को उतारकर परनीत की रणनीति में पेंच फंसा दिया है। राजघराने के समर्थक हिंदू वोटों का बंटवारा रोकने के लिए शर्मा को बाहरी बता रहे हैं। ऐसे में यहां हिंदुओं की भूमिका सबसे अहम हो गई है। हिंदू एकसाथ रहे तो भाजपा के लिए सकारात्मक और बंटे तो आप-कांग्रेस की उम्मीदें बढ़ जाएंगी।
परनीत व धर्मवीर के आने से पुराने कार्यकर्ता असंतुष्ट
परनीत को भाजपा व धर्मवीर को कांग्रेस से टिकट मिलने से दोनों ही दलों के स्थानीय नेताओं व कार्यकर्ताओं में नाराजगी के सुर हैं। परनीत यहां से चार बार की सांसद और कैप्टन अमरिंदर पटियाला शहर से कांग्रेस से विधायक रहे हैं।
पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी संघर्ष से हालात ऐसे बनें कि 2021 में अमरिंदर ने अलग पार्टी बना ली। हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में अपनी सीट हार गए। अब 2024 का लोकसभा चुनाव आया तो परनीत संग भाजपा में शामिल हो गए। परनीत कौर यदि भाजपा में जाकर भी अपना चुनाव नहीं बचा पाईं, तो रियासत की सियासत पर सवाल खड़े होंगे ही।
57 वर्षों में 39 साल रियासत का राज
57 सालों में 39 साल इसी खानदान के लोग लोकसभा के लिए चुनकर जाते रहे हैं। 1967 से 71 तक रियासत की आखिरी महारानी मोहिंदर कौर सांसद रहीं। 1980 से 84 तक कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नुमाइंदगी की। महारानी परनीत भी 1999, 2004 और 2009 में लगातार और 2019 में चौथी बार सांसद चुनी गईं। मनमोहन सरकार में विदेश राज्यमंत्री रहीं। वहीं, अमरिंदर 2002, 2007, 2012 और 2017 में लगातार विधानसभा चुनाव जीते और दो बार मुख्यमंत्री बनें। पटियाला में कैप्टन के कद वाला दूसरा नेता नहीं दिखता।
17 में 11 बार चुनी गई कांग्रेस
1952 से अब तक हुए 17 लोकसभा चुनावों में सबसे अधिक 11 बार कांग्रेस ने जीत हासिल की। हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। पटियाला लोकसभा के सभी नौ विधानसभा क्षेत्रों राजपुरा, घन्नौर, सन्नौर, पटियाला शहरी व ग्रामीण, नाभा, समाना, शुतराणा व डेराबस्सी में सत्तारूढ़ आप के विधायक हैं।
प्रवासी वोटरों का भी असर
पटियाला में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर काम करते हैं। इनमें यूपी, बिहार से लेकर राजस्थान, जम्मू काश्मीर और हरियाणा-हिमाचल तक के लोग मिल जाते हैं। इनमें खेती-किसानी से लेकर सर्विस सेक्टर में काम करने वाले हैं। तमाम लोगों ने यहीं घर-परिवार बसा लिया है।
यूपी में गोंडा के जसकरन गुप्ता 20 साल से हैं। गुप्ता कहते हैं कि प्रवासियों का वोट हर कोई चाहता है। पर प्रवासियों के ठहरने, उनके बच्चों की शिक्षा व रोजगार के अवसरों में भागीदारी की कोई बात नहीं करता। वह कहते हैं कि यहां लड़ाई में चारों ही हैं।