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कला भवन में गूंजी मिर्जा-साहिबा की मोहब्बत की दास्तां

Thu, 13 Feb 2014 09:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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साहिबा पढ़े पट्टियां, मिरजा पढ़े कुरान, यारो विच्च मसीत लगीयां, जाणे कुल जहान। पंजाब कला भवन के रंधावा ऑडिटोरियम में बुधवार को नरिंदर निंदी के निर्देशन में किस्सा मिरजा साहिबा बैले पेश किया गया।
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यह इसके साथ ही पंजाब के लोक साजों की धुनों और लोक गीतों को बाखूबी पेश किया गया। इस दौरान वीना ने साहिबा, हुसन लाल ने मिरजा, मलकीत मलंगा ने करमु, बसंत लाल ने बिंजल, सन्नी संधु ने खीवा खान, बिलो ने मां, मलकीत संधु ने भाभी, सुख ने छती बहन, कमल, जसप्रीत, उमा, रविंदर, मलकीत, मनकंवर ने भाइयों एवं नृतकों की अदाकारी निभाई।

सभी प्रोग्रामों के गायक नरिंदर निंदी, बसंत लाल और गायिका शैली और मलकीत संधु थे। नाटक में संगीत संजीव, देवराज और मुंदरी लाल ने दिया। इसकी स्क्रिप्ट निर्देशक निंदी ने ही लिखी, जिसे पंजाब कला परिषद की ओर से पेश किया गया।
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गायक मलकीत सिंह ने बताया कि मिरजा साहिबा बैले नृत्य नाट है, जो कि पंजाब कला इंटरनेशनल ग्रुप की और से किया   गया। इस प्रोग्राम में मिरजा साहिबा के जन्म से लेकर उसके मृत्यु तक की कहानी बताई गई।

इसकी कहानी कुछ इस तरह बताई गई। इसमें साहिबा की शादी के दिन मिरजा उसे भगा कर ले जाता है और साहिबा के घर पर यह बात पता चलने पर साहिबा के भाई मिरजा को मार देते हैं। यह कहानी 25-30 मिनट में किस्सा कवि की ओर से बताई गई। उन्होंने सेक्टर 43 के सरकारी स्कूल में इसकी तैयारी की।


मुंदरी लाल जिनकी उम्र 70 वर्ष है, वह पंजाब के सभी लोक साज बजा लेते हैं। वह लड़की के रूप में नृत्य करते थे और इसी नृत्य ने उन्हें काफी प्रसिद्ध किया। वे पाकिस्तान के रहने वाले हैं, 18 साल से यह नृत्य करते आए हैं और 1985 से वह पंजाब कला इंटरनेशनल ग्रुप के साथ जुड़े हुए हैं।
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