पंजाब की जेलों में कैदियों द्वारा दवाओं के माध्यम से ड्रग्स लेने का मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के संज्ञान में लाया गया है। मामले का खुलासा इस तरह हुआ। दरअसल, मामला तब उजागर हुआ जब लुधियाना जेल में कैदी को डाक्टर ने ड्रग मिश्रित इंजेक्शन देने से इनकार कर दिया। जिसके बाद कैदी ने उस पर हमला कर दिया। हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच लुधियाना के सेशन जज को सौंप दी है।
एनजीओ लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल के वकील नवकिरन सिंह के जरिए जेलों में ड्रग्स को लेकर अर्जी दाखिल की गई है। अर्जी पर हाईकोर्ट ने पंजाब के डीजीपी (जेल) और स्वास्थ्य निदेशक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने पंजाब की जेलों में पिछले एक साल के दौरान दवा आपूर्ति का ब्योरा सौंपने के आदेश दिए हैं। नवकरन सिंह ने कहा कि जेल में नशीले इंजेक्शन का लगातार उपयोग 11 सितंबर को तब सामने आया जब डाक्टर पर कुछ नशेड़ियों ने हमला किया था।
उन्होंने कहा कि इस मामले को अधिक गंभीरता मिली क्योंकि इसमें जेल स्टाफ की मिलीभगत थी। यहां तक कि जेल स्टाफ ने एम्बुलेंस तक नहीं बुलाई। नवकरन सिंह ने यह भी दावा किया कि एक निश्चित संख्या में कैदियों को ऐसी दवाएं दी जाती हैं जिसके चलते वे ड्रग के आदी हो रहे हैं। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर यह स्पष्ट कर दिया था कि जांच एजेंसियों को ड्रग्स के स्रोत के बारे में जानकारी एकत्रित करनी होगी।