विख्यात स्कॉलर भाई कान्ह सिंह नाभा द्वारा 1930 में लिखे गए गुरुशब्द रत्नाकर महाकोष के अनुवाद को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की।
हाईकोर्ट ने कहा कि हम कानूनविद धर्म ग्रंथों के अनुवाद के प्रश्न का जवाब कैसे दे सकते हैं। यह कार्य शिक्षाविदों का है। यदि इस प्रकार के मामलों में हस्तक्षेप किया गया तो आज महाकोष है, कल गीता होगी और परसों कुछ और। कोर्ट ने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए एक्सपर्ट बॉडी ही सही विकल्प है।
मामले में याची ने अपना पक्ष रखने के लिए समय दिए जाने की अपील की जिसपर हाईकोर्ट ने सुनवाई को टाल दिया। पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला की ओर से महाकोष का हिंदी व अंग्रेजी में अनुवाद त्रुटियों के चलते बीते दिनों विवाद में आ गया।