फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट की फटकार- प्राकृतिक संसाधनों को बिल्डरों के हाथ सौंपने पर क्यों तुली है हरियाणा सरकार

Fri, 21 Feb 2020 11:27 AM IST
खुशबू गोयल विवेक शर्मा, चंडीगढ़
विज्ञापन
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
एनसीआर में नेचुरल कंजरवेशन जोन (एनसीजेड) नोटिफाई करने में देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाई। कहा कि सरकार प्राकृतिक संसाधनों को बिल्डरों के हाथ सौंपने पर क्यों तुली है। एनसीजेड को नोटिफाई करने में देरी इसलिए की जा रही है ताकि कुछ खास लोगों को कॉलोनियां काटने का मौका दिया जा सके।
विज्ञापन


कोर्ट में केस की सुनवाई आरंभ होते ही याची चंद्रशेखर मिश्रा की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि 1992 में एनसीजेड के लिए भूमि 1 लाख्र 22 हजार 113 हेक्टेयर थी जो 2012 में घटकर 90 हजार 402 हेक्टेयर हो गई और वर्तमान में अब केवल 64 हजार 384 हेक्टेयर रह गई है। याची ने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि सीएलयू की अनुमति दे दी गई थी और लगातार निर्माण कार्य चल रहा है।

इस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सीएलयू पर रोक के आदेश इस आश्वासन के बाद हटाई गई थी कि बिना यह सुनिश्चित किए कि भूमि एनसीजेड में तो नहीं आ रही सीएलयू नहीं दिया जाएगा। उस समय कहा गया था कि जल्द ही एनसीजेड नोटिफाई किया जाएगा, लेकिन आज तक नहीं किया गया है।
विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

भूमि कम नहीं हुई

इस पर हाईकोर्ट को बताया गया कि भूमि कम नहीं हुई है और न ही किसी को गलत तरीके से भूमि दी गई है। जो भूमि का आंकड़ा है वह सेटेलाइट के आधार पर तैयार किया गया है। 1992 में 1 पिक्सल में 24 मीटर भूमि दिखाई देती थी तो 2012 में मीटर और अब तकनीक के एडवांस होने के चलते एक पिक्सल में 25 सेंटीमीटर भूमि दिखाई देती है। हालांकि अभी धरातल की वास्तविक स्थिति जानने के लिए सर्वे किया जा रहा है। कोर्ट ने इस पर फटकार लगाते हुए कहा कि अगर इस प्रकार देरी जारी रहेगी तो सभी संसाधन समाप्त हो जाएंगे।

हलफनामा कॉपी पेस्ट जैसा
हाईकोर्ट में सरकार द्वारा सौंपे गए हलफनामे पर भी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि हर बार सरकार का हलफनामा एक जैसा होता है। ऐसा लगता है कि कॉपी पेस्ट हुआ है और धरातल पर सरकार ने कोई काम नहीं किया है। एक बार तो कोर्ट एनसीआर में सीएलयू पर रोक लगाने को तैयार हो गया लेकिन इसके बाद सुनवाई भोजन अवकाश के बाद करने का निर्णय लिया। बार एसोसिएशन के एक पदाधिकारी की मृत्यु के कारण भोजन अवकाश के बाद वकीलों ने मृतक वकील को श्रद्घांजलि देते हुए लंच के बाद वर्कसस्पेंड करने की घोषणा कर दी। जिसके चलते सुनवाई नहीं हो सकी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें