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हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी, पति के रिश्तेदारों की प्रॉपर्टी पर दावा नहीं कर सकती पत्नी

Tue, 01 May 2018 05:13 PM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हाईकोर्ट
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बहू द्वारा ससुर के फ्लैट पर किए गए दावे को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। साथ ही हाईकोर्ट ने बहू के अधिकारों को भी परिभाषित किया है। कोर्ट ने कहा कि पति द्वारा किराए पर लिया गया, उसका अपना या संयुक्त परिवार का जिसमें पति रह रहा हो केवल उसी घर में रहने के लिए पत्नी दावा कर सकती है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने बहू को ससुर का घर खाली करने के आदेश दिए है। याची का विवाह गुरुग्राम में हुआ था। विवाह के बाद दोनों अमेरिका चले गए थे। यूएसए से पत्नी आ गई थी और वह मायके में रह रही थी।
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इसी बीच पति अमेरिका से अपना बिजनेस समेट कर गुरुग्राम आ गया और पिता के घर में पत्नी के साथ रहने लगा। कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच संबंध खराब हो गए। पत्नी ने पति और मेरठ में रह रहे सास-ससुर के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज करवा दिया। साथ ही जिस फ्लैट में महिला पति के साथ रह रही थी, उससे न निकाले जाने की अर्जी दी। अर्जी को मंजूर करते हुए निचली अदालत ने उसे फ्लैट से निकालने पर रोक लगा दी।

हाईकोर्ट में जब यह मामला सुनवाई के लिए आया तो पत्नी की ओर से कहा गया कि इस फ्लैट में वह पति के साथ रहती है। इस लिए यह फ्लैट डोमस्टिक वॉयलेंस एक्ट के सेक्शन-2 के तहत शेयर्ड हाऊसहोल्ड की श्रेणी में आता है। इस कारण उसे इस फ्लैट से निकाला नहीं जा सकता है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यदि वर्तमान परिभाषा को देखें तो पति के किसी भी रिश्तेदार के घर में यदि पत्नी उसके साथ कुछ दिन रहती है तो वह घर शेयर्ड हाऊसहोल्ड होगा।
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आगे कानून को स्पष्ट करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी केवल उसी घर पर दावा कर सकती है जो पति ने किराये पर लिया हो या उसका अपना हो या पति अपने परिजनों के साथ रहता हो। बता दें कि इस मामले में पति अपने पिता के मकान में पत्नी के साथ रहता था। जबकि माता-पिता इस फ्लैट में कभी भी उनके साथ नहीं रहते थे। ऐसे में यह शेयर्ड हाऊसहोल्ड की श्रेणी में नहीं आता है।

सास-ससुर साथ नहीं रहे तो उनपर घरेलू हिंसा का आरोप नहीं बनता
इस मामले में सास-ससुर ने घरेलू हिंसा का मामला दर्ज करने को चुनौती दी थी। उनकी अपील को मंजूरी देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जब सास-ससुर कभी बहू के साथ रहे ही नहीं तो ऐसी स्थिति में उनके ऊपर घरेलू हिंसा का मामला नहीं बनता है। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने दोनों के खिलाफ चल रही कार्रवाई को खारिज करने के आदेश दिए।

पत्नी के दूसरी शादी कर लेने से घरेलू हिंसा की शिकायत खत्म नहीं हो जाती
इस मामले मे सास-ससुर पर घरेलू हिंसा के मामले को तो हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया। लेकिन पति को कोई राहत देने से इनकार कर दिया। पति ने कहा था कि उन दोनों के बीच तलाक हो चुका है और पत्नी ने दूसरी शादी कर ली है। ऐसे में अब घरेलू हिंसा मामले का कोई मतलब नहीं रह जाता है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी की शादी से कार्रवाई पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। अपराध हुआ है या नहीं इसका फैसला न्यायालय को लेना है।
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