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आरक्षण पर फंसा पेंच, 'सरकार बताए कि कितने अगड़े और कितने पिछड़े जाट'

Tue, 28 Feb 2017 04:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा जाट आरक्षण आंदोलन
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हरियाणा में जाटों सहित छह जातियों को आरक्षण के खिलाफ याचिका के मामले में फिर से पेंच फंस गया है। हाईकोर्ट ने सरकार को जवाब तलब किया है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याची की ओर से सरकारी विभागों में 37-62 प्रतिशत उच्च पदों पर जाटों के होने की दलीलों का विरोध करने पर अदालत ने हरियाणा सरकार से जवाब तलब कर लिया है।
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पूछा है कि यदि याची की तरफ से पेश आंकड़े गलत हैं, तो जाटों के प्रतिनिधित्व के सही आंकड़े क्या हैं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अब हरियाणा सरकार और याची दोनों अपने आंकड़ों के साथ अपनी-अपनी दलीलों के आधार पर बहस करें और बताएं कि प्रदेश में कितने अगड़े और कितने पिछड़े जाट मौजूद हैं। हाईकोर्ट ने साल 2014 में दाखिल याचिका को भी वर्तमान याचिका के साथ जोड़ने के निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई वीरवार तक टाल दी है। 

सोमवार को हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से विभागों में जाटों के प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों पर जवाब मांगा। इस पर हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के राम सिंह केस का हवाला दिया। कहा कि नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लास द्वारा आईसीएसएसआर को जाटों के प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों को जमा करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
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आईसीएसएसआर के अनुसार ये रहे जाट आबादी के आंकड़े

जाट आरक्षण आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
आईसीएसएसआर के अनुसार हरियाणा में जाटों की आबादी कुल आबादी का 25 प्रतिशत है। जबकि सरकारी नौकरियों में उनका प्रतिनिधित्व 21 प्रतिशत है। ऐसे में वे अपने आबादी के मुकाबले 4 प्रतिशत कम प्रतिनिधित्व पा रहे हैं। जस्टिस एसएस सारौं ने कहा कि यदि 21 प्रतिशत प्रतिनिधित्व है, तो क्या इसे पिछड़ा माना जाए?

इस पर याची की ओर से बताया गया कि साल 2014 में जाटों को आरक्षण देने के लिए जारी की गई हरियाणा सरकार की नोटिफिकेशन के खिलाफ उन्होंने जो याचिका दाखिल की थी उसमें जाटों के प्रतिनिधित्व का ब्यौरा था। उनके पास आरटीआई व सरकार की वेबसाइट से प्राप्त जानकारी है।

इसके अनुसार हरियाणा में 39 प्रतिशत आईएएस, 37 प्रतिशत आईपीएस, 42 प्रतिशत एचसीएस एग्जीक्यूटिव, 62 प्रतिशत आईएफएस, फूड सप्लाई विभाग में 30 प्रतिशत तथा एचपीएस में 37 फीसदी पदों पर जाट काबिज हैं।

याची ने कहा कि उनके द्वारा सौंपे गए आंकड़ों पर सरकार की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया, जिसका अर्थ है कि सरकार भी याची के इन आंकड़ों को स्वीकार करती है।  इस पर हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया कि उन्होंने याची के आंकड़ों पर आपत्ति जताते हुए हलफनामे के माध्यम से जवाब दाखिल किया था।
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