तेजी से सूख रही सुखना लेक को देखने के लिए हाईकोर्ट के जज पहुंचे तो उन्होंने टिप्पणी करते हुए कई सख्त निर्देश अफसरों को दिए। सुखना के गिरते जलस्तर की समस्या का समाधान ढूंढने के लिए दस्ते के साथ निकले जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस रामेंद्र जैन।
उन्होंने निर्धारित स्थानों का निरीक्षण करने के बाद टिप्पणी करते हुए कहा कि डैम से पानी लाया जाए या बोरवैल किया जाए, सुखना को फिर से वेल करना ही इस निरीक्षण का मकसद है। विजिट पूरी होने के बाद एमिकस क्यूरी तनु बेदी की अगुवाई में एक टीम को पंचकूला क्षेत्र से पानी के विकल्पों को तलाशने के लिए रवाना कर दिया गया।
जस्टिस मित्तल की ओर से यूटी और पंजाब में मौजूद विकल्पों के बारे में इससे पहले विजिट कर जानकारी ली गई। शनिवार को जस्टिस एके मित्तल, जस्टिस रामेंद्र जैन, चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुवीर सहगल, एमिकस क्यूरी तनु बेदी व एमएल सरीन सहित हरियाणा, पंजाब और यूटी के आला अधिकारी कोर्ट नंबर चार में एकत्रित हुए।
इसके बाद निर्धारित किया गया कि कौन-कौन से स्थानों का निरीक्षण किया जाएगा। जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस रामेंद्र जैन की अगुवाई वाले इस पूरे दस्ते ने हाईकोर्ट से अपनी विजिट को आरंभ करते हुए पंजाब और चंडीगढ़ में मौजूद ऐसे सभी विकल्पों को परखा, जिससे सुखना में पानी लाने को संभव बनाया जा सकता है।
पूरे दस्ते ने सिरसवां डैम, जयंती डैम, सेक्टर 39 वाटर वर्क और सेक्टर 28 के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट आदि का निरीक्षण किया। इस दौरान इन सभी स्थानों पर मौजूद तकनीकी विशेषज्ञों से जस्टिस एके मित्तल ने बात की और जाना कि क्या इस पानी को सुखना की ओर मोड़ा जा सकता है।