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टेंडर पर टर्नओवर की शर्त हटाने से हाईकोर्ट का इंकार, एक अहम व्यवस्था दी

Tue, 18 Apr 2017 12:14 PM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कोर्ट
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छोटे टेंडर में शामिल होने के लिए टर्नओवर की शर्त को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम व्यवस्था दी है। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि टर्नओवर कंपनी की विश्वसनीयता, अनुभव और सक्षमता का परिचय देता है।
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टेंडर जारी करने वाला संस्थान अपनी आवश्यकता के अनुरूप टर्नओवर की डिमांड रख सकता है। मामला पीजीआई में दवाओं की सप्लाई के टेंडर से जुड़ा है। याचिका दाखिल करते हुए एलआई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की ओर से कहा गया कि याची दवाओं के क्षेत्र में बेहद अनुभव रखने वाली कंपनी है। कई जीवनरक्षक दवाओं की निर्माता भी है।

याची ने कहा कि पीजीआई में हाल ही में दवाओं की सप्लाई के लिए टेंडर जारी किया गया, जिसमें ऐसी शर्त रखी गई कि याची कंपनी रेस से बाहर हो गई। याची ने कहा कि टेंडर कुछ दवाओं की सप्लाई से जुड़ा था, जबकि इसके लिए टर्नओवर 200 करोड़ की मांग ली गई, जो सीधे तौर पर गलत, गैर कानूनी और याची के अधिकारों का हनन करने वाली है।
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याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एसजे वजीफदार ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि भले ही दवाओं की मात्रा कम हो और टेंडर में मांगी गई टर्नओवर की राशि अधिक लेकिन टर्नओवर निर्धारित करना संस्थान का अधिकार है।

दूसरा सवाल यह कि टर्नओवर कितना निर्धारित किया जाए, यह भी संस्थान पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार का उत्पाद मंगवा रहा है और इसके लिए उसे कितनी विश्वसनीयता की जरूरत है। जितना ज्यादा टर्नओवर होता है, वह यह बताता है कि बाजार में कंपनी की इमेज क्या है और उसको कितना स्वीकार किया जाता है। साथ ही टर्नओवर यह बताने के लिए एक अच्छा मानक है कि कंपनी कितनी योग्य है और क्या वह लिया हुआ कार्य करने में सक्षम भी है या नहीं।
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