बीमा कंपनी द्वारा मृतक की रिटायरमेंट नजदीक होने के चलते आधा क्लेम वेतन के अनुसार तथा आधा क्लेम पेंशन के अनुसार निर्धारित करने की अपील हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही मृतक की रिटायरमेंट नजदीक थी लेकिन स्प्लिट मल्टीप्लायर इस्तेमाल कर क्लेम को दो हिस्सों में निर्धारित नहीं किया जा सकता। कंपनी को क्लेम वेतन के अनुसार ही देना होगा।
मोहाली निवासी सुखविंदर सिंह अपने स्कूटर से घर की ओर आ रहा था कि अचानक एक कार ने उसे टक्कर मार दी जिससे उसकी मौके पर मौत हो गई। इसके बाद मुआवजे के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल की गई। याचिका पर ट्रिब्यूनल ने 2917000 रुपए का क्लेम निर्धारित किया।
इसके खिलाफ बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि मृतक की आयु एक्सीडेंट के समय 53 साल थी और वह जल्द ही रिटायर होने वाला था। ऐसे में उसकी रिटायरमेंट तक उसके वेतन के अनुसार तथा रिटायरमेंट के बाद उसकी बनने वाली पेंशन के आधार पर मुआवजा दिया जाए।
इस पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि एक व्यक्ति के जीवन का मूल्य पैसे से नहीं लगाया जा सकता। हालांकि व्यक्ति के उसके परिवार के प्रति दायित्वों को ध्यान में रखना जरूरी है। घर का मुखिया रिटायरमेंट के बाद भी मुखिया ही रहता है और उसकी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं।
रिटायरमेंट के बाद व्यक्ति के पास अनुभव भी होता है और रीइंप्लॉयमेंट का मौका भी। ऐसे में स्प्लिट मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करने की दलील नहीं मानी जा सकती है। रिटायरमेंट होने से व्यक्ति की परिवार के प्रति जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती बल्कि वह अपने परिवार केलिए और अधिक करने में सक्षम होता है। ऐसे में हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल का फैसला बरकरार रखते हुए बीमा कंपनी की याचिका खारिज कर दी।