छात्रों की ट्रांसपोर्टेशन के मुख्य साधन के तौर पर प्रयोग होने वाले स्कूल बसों को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फरमान सुनाया है। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार, स्कूल बसों में सुरक्षित स्कूल वाहन नीति के प्रावधान लागू किए जाने की जांच होगी।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में इसकी जांच की जिम्मेदारी दोनों राज्यों और यूटी के बाल अधिकार सुरक्षा आयोग को सौंपी है। इस मामले में अनियमितता मिलने पर आयोग सरकारों से स्कूल बसों के चलने पर पाबंदी लगाने की सिफारिश कर सकेंगे।
15 फरवरी तक कोर्ट में पेश होगी जांच रिपोर्ट :
जस्टिस राजीव भल्ला की एकल बेंच ने राज्य स्तरीय आयोगों को स्कूल बसों पर विशेष अधिकार शुक्रवार को दिए। साथ ही दोनों राज्यों की सरकारों और यूटी को निर्देश दिया है कि आयोगों को शिक्षा विभाग और पुलिस का एक-एक अधिकारी तथा वाहन भी उपलब्ध कराए। आयोगों से कहा गया है कि वह 15 फरवरी तक अपने अधिकार क्षेत्र के सभी स्कूलों की बसों की जांच कर 15 फरवरी तक रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करें।
नोडल अधिकारी लगाने का आदेश वापस :
हाईकोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि जांच जनहित में हो, अधिकारों का दुरुपयोग करके किसी को बेवजह परेशान न किया जाए। इससे पहले आयोगों को नोडल अधिकारी लगाने को कहा गया था, लेकिन आयोगों को सशक्त बनाते हुए नोडल अधिकारी लगाने का आदेश वापस ले लिया गया है।
आयोगों को स्कूलों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश :
बेंच ने पंजाब, हरियाणा एवं यूटी के शिक्षा विभागों से कहा है कि वह छात्रों की ट्रांसपोर्टेशन वाले एडेड, नॉन एडिड और सरकारी स्कूलों की सूची आयोगों को 15 दिन में मुहैया कराए। बेंच ने हेल्पलाइन नंबरों को स्कूल बसों पर डिसप्ले करने का निर्देश भी दिया है, ताकि किसी अनियमितता पर शिकायत की जा सके।
उल्लेखनीय है कि स्कूल बसों में छात्रों की ट्रांसपोर्टेशन के लिए सुरक्षात्मक मापदंड अपनाने के लिए हाईकोर्ट ने सुरक्षित वाहन नीतियां बनाने को कहा था। नीतियां बन चुकी हैं और अब नीतियों के प्रावधानों की जांच का जिम्मा बाल अधिकार सुरक्षा आयोगों को सौंपा गया है। नीतियों में हाईकोर्ट ने स्कूल बसों को ई-सर्विलांस के दायरे में लाने का निर्देश तो दिया ही था, बल्कि बसों में अटेंडेंट के तौर पर ट्रांसजेंडर लगाने की व्यवस्था बनाने को भी कहा था।