विवाहित बेटी को अनुकंपा आधार पर नौकरी नहीं दी जा सकती है। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने एक याचिका का निपटारा करते हुए यह बड़ा फैसला सुनाया है। विवाहित बेटी को नौकरी देने से मृतक के आश्रित परिवार को कोई वित्तीय लाभ नहीं मिलता, जो अनुकंपा आधार पर नौकरी देने का मुख्य उद्देश्य है।
अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की नीति मृतक के आश्रितों को वित्तीय संकट की स्थिति से उबारने के लिए बनाई गई है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह अहम आदेश गुरप्रीत कौर की याचिका को खारिज करते हुए सुनाया है।
याचिका दाखिल करते हुए गुरप्रीत कौर ने कहा था कि उसके पिता पंजाब में जेबीटी अध्यापक थे और उनकी मौत 17 अगस्त 2001 को हो गई थी। 11 दिसंबर 2001 को याची ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए आवेदन किया था जो ऑब्जेशन लगकर वापस आ गया।
इसके बाद 7 मई 2002 को फिर से आवेदन किया गया जिसका 2012 में इसका जवाब आया कि उसका आवेदन पत्र ट्रेस नहीं हो पा रहा है। इसके बाद जनवरी 2012 में फिर से आवेदन किया गया जिसे 4 जून 2014 को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि याची की शादी हो चुकी है।