हरियाणा के पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामकिशन फौजी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सिंगल बेंच से मिली राहत को डबल बेंच ने साइडलाइन करते हुए फौजी के खिलाफ स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) का गठन कर जांच करने के आदेश जारी किए।
वीरवार को हाईकोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एबी चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि हरियाणा के डीजीपी प्रदेश के ऐसे आईपीएस अधिकारी को एसआईटी का जिम्मा सौंपें, जिनका सीधा संबंध हरियाणा से न हो।
सीएलयू के एवज में पांच करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में घिरे फौजी के खिलाफ हरियाणा के लोकायुक्त ने केस दर्ज करने की सिफारिश की थी। लेकिन इस सिफारिश को हाईकोर्ट की एकल बेंच ने खारिज कर दिया था।
इसके बाद मामला डबल बेंच के समक्ष पहुंचने पर वीरवार को दोनों जजों की खंडपीठ ने न सिर्फ एसआईटी बनाने के निर्देश जारी कर दिए, बल्कि हरियाणा सरकार की एफआईआर खारिज करने की मांग पर भी रोक लगाने से इंकार कर दिया। हालांकि इस अपील को खंडपीठ ने सुनवाई के लिए एडमिट कर लिया।
यह है मामला
वर्ष 2013 में इनेलो ने प्रदेश में सीडी अभियान चलाकर रामकिशन फौजी व तत्कालीन अन्य विधायकों की पोल खोलने का दावा किया था। इनेलो की ओर से जारी सीडी में दिखाया गया था कि सीएलयू के एवज में विधायक आवेदकों से पैसों की मांग कर रहे हैं। उस समय इनेलो ने पांच अलग-अलग सीडी जारी की थी, जिनमें मुख्य संसदीय सचिव रामकिशन फौजी, राव नरेंद्र सिंह, हांसी के विधायक व मुख्य संसदीय सचिव विनोद भ्याना, बरवाला के विधायक रामनिवास घोड़ेला, रतिया के विधायक जरनैल सिंह और उकलाना के विधायक नरेश सेलवाल को सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) दिलाने के अलावा दूसरे कामों के लिए पैसों की मांग करते दिखाया गया था।