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Chandigarh: हाईकोर्ट ने तोड़ी अंग्रेजों के जमाने की परंपरा, हर साल बचेंगे 21 हजार पेड़ और 168 करोड़ लीटर पानी

Sun, 02 Feb 2025 12:37 PM IST
अंकेश ठाकुर विवेक शर्मा, चंडीगढ़

सार

पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ दिया है। चंडीगढ़ के विवेक तिवारी की याचिका को स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालन ने अंग्रेजों के जमाने की परंपरा को खत्म कर दिया है। इस फैसले से अब हर साल 21 हजार पेड़ और 168 करोड़ लीटर पानी की बतच होगी।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अंग्रेजों के जमाने से चले आ रही परंपरा को तोड़ते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने लीगल पेपर के साथ-साथ अब ए4 कागज के इस्तेमाल व लीगल पेपर पर दोनों ओर प्रिंटिंग को स्वीकार कर लिया है। अब हाईकोर्ट, हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ में इस व्यवस्था के तहत याचिकाएं, हलफनामे व अन्य प्रकार के दस्तावेजों को सौंपा जा सकेगा। इससे हर साल 21 हजार पेड़, 168 करोड़ लीटर पानी की बचत होगी। 

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चंडीगढ़ निवासी विवेक तिवारी व अंजलि ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट में ए-3 साइज की जगह ए-4 कागज का इस्तेमाल करने की मांग की थी। याचिका में हाईकोर्ट के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ की सभी अधीनस्थ अदालतों, ट्रिब्यूनल में दायर की जाने वाली याचिकाओं, हलफनामे या अन्य दस्तावेजों के लिए एक तरफ छपाई के साथ लीगल पेज (ए 3) के उपयोग करने की वर्तमान प्रथा पर रोक लगाने की मांग की गई है। यह नियम दशकों पहले तैयार किए गए थे जब औपनिवेशिक समय था। 

उस समय कागज की मोटाई और स्याही की गुणवत्ता के कारण कागज के एक तरफ ही छपाई होती थी। दूसरी तरफ स्याही के रिसाव के कारण उस पर प्रिंटिंग संभव नहीं थी, लेकिन अब पेपर प्रिंटिंग तकनीक और स्याही से संबंधित तकनीकों की प्रगति के चलते यह समस्या नहीं रही है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी इंडियन ज्यूडिशियरी एनुअल रिपोर्ट के अनुसार पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक साल में करीब 3 करोड़ 9 लाख पन्नों का इस्तेमाल हुआ था। हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ की अदालतों को मिलाकर 30.54 करोड़ पन्ने इस्तेमाल किए गए थे।

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