महिला से मातृत्व का अधिकार छीनना क्रूरता, तलाक का आदेश
महिला की मर्जी के खिलाफ गर्भपात करा मातृत्व का अधिकार छीनने को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने क्रूरता माना है। इसके साथ ही महिला की याचिका मंजूर करते हुए तलाक का आदेश दिया है। हिसार की फैमिली कोर्ट ने तलाक की याचिका को खारिज कर दिया था और इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट में अपील की।
महिला ने बताया कि उसका विवाह 2012 में हिसार में हुआ था। उसे दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया गया। शादी से पहले अपनी कमाई से उसने जो रकम जोड़ी थी उसे भी सास ने छीन लिया। 2014 में वह गर्भवती हुई तो पति ने जबरन गर्भपात करवा दिया। पति ने कहा कि अभी बच्चा नहीं चाहिए। गर्भपात के बाद उसे आराम नहीं करने दिया गया। इस कारण वह ऐसी बीमारी का शिकार हो गई कि कभी मां नहीं बन सकती। महिला ने बताया कि पति व ससुराल वाले उसके चरित्र पर शक करते हैं। उसके जन्मदिन पर रिश्तेदारों व साथ काम करने वालों ने बधाई दी तो पति ने मोबाइल तोड़ दिया।
इन दलीलों का विरोध करते हुए उसके पति ने कहा कि वह पत्नी के साथ रहने को तैयार है, लेकिन पत्नी उसके साथ नहीं रहना चाहती है। हाईकोर्ट ने कहा कि एक औरत के लिए मातृत्व बेहद मायने रखता है। उसकी मर्जी के खिलाफ गर्भ गिराना मातृत्व का अधिकार छीनना है। यह एक महिला के प्रति क्रूरता है। महिला ने बच्चे की चाह के लिए अपना इलाज तक कराया, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। ऐसे में पति से तलाक लेने का उसे पूरा अधिकार है।