चंडीगढ़ पीजीआई चंडीगढ़ में संक्रामक रोग विषय में सहायक प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति प्रक्रिया संबंधी याचिका पर फैसला सुनाते हुए पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने नियुक्ति पर रोक लगा दी है। सुनवाई में पीजीआई की ओर से बताया गया कि इंटरनल मेडिसिन के विभागाध्यक्ष ने निदेशक को इस संबंध में सुझाव दिया है। हालांकि अंतिम फैसला गवर्निंग बॉडी ही ले सकती है। इस जानकारी के बाद न्यायालय ने पीजीआई को निर्देश दिया कि जब तक इस पर निर्णय नहीं लिया जाता है तब तक संक्रामक रोग विषय में सहायक प्रोफेसरों के पदों पर नई भर्ती नहीं होगी।
फैसला लिए जाने के बाद पीजीआई न्यायालय को सूचित कर सकता है। तब न्यायालय इस रोक को हटा देगा। सोसाइटी ऑफ़ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड इंफेकशियस डिसीसेस इन इंडिया ने याचिका में बताया है कि एमसीआई ने 13 मई 2014 को पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन कमेटी के साथ हुई बैठक में यह तय किया था कि ट्रॉपिकल मेडिसिन में एमडी करने वालों को डीएम इंफेक्शियस डिसीसेस (संक्रमित रोग) विषय के एंट्रेंस में शामिल होने के योग्य माना जाएगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसे ही एक मामले में 2016 में इस पर अपनी मोहर लगा दी थी।
सोसाइटी ने उच्च न्यायालय को बताया कि पीजीआई ने गत वर्ष 4 जनवरी को विज्ञापन जारी कर संक्रामक रोग विषय में सहायक प्रोफेसर की भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया। 8 जनवरी को स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन निदेशक ने पीजीआई के निदेशक को पत्र लिखकर इस पद के लिए ट्रॉपिकल मेडिसिन में एमडी करने वाले आवेदकों को भी शामिल किए जाने का आग्रह किया। गत वर्ष 18 जनवरी को पीजीआई ने निदेशक के इस आग्रह पर बिना कोई गौर किए ही भर्ती की यह नोटिफिकेशन ही वापस ले ली।
16 दिसंबर को पीजीआई ने कई अन्य विषयों सहित संक्रामक रोग विषय में सहायक प्रोफेसर के पदों पर नियुक्ति किए जाने का विज्ञापन फिर जारी कर दिया। याचिका में बताया गया कि इस बार फिर स्कूल ऑफ़ ट्रॉपिकल मेडिसिन निदेशक ने पीजीआई को पत्र लिख दोबारा आग्रह किया, जिस पर अब तक कोई गौर ही नहीं किया गया है और आवेदन की अंतिम तिथि भी निकल गई है।