चंडीगढ़ के कुछ प्रभावशाली हैं, जो अपने निहित स्वार्थ के चलते चाहते ही नहीं शहर में कुछ भी बेहतर हो। जनहित में किए जा रहे काम को गलत तरीके से पेश किया गया और जो पूरी तरह से दुर्भाग्यपूर्ण है। जस्टिस अमोल रतन सिंह ने यह टिपण्णी सेक्टर 27 के अवैध अतिक्रमण को लेकर की है। उन्होंने कहा कि जो जनहित हैं और आम लोगों के लिए हैं उसे ऐसे पेश किया जा रहा है जैसे यह उनके खिलाफ है ताकि ग्राउंड लेवल पर कुछ भी न हो सके।
सेक्टर-19 से हाईकोर्ट के आदेशों पर शहर के रिहायशी इलाकों की सड़कों के किनारे किए गए अतिक्रमण हटाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन और निगम को जो आदेश दिए थे, उन पर खंडपीठ ने 4 जनवरी को रोक लगा दी थी। इसी रोक के आदेशों को हटाए जाने की मांग को लेकर भी एक याचिका चीफ जस्टिस की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई थी। चीफ जस्टिस कृष्णा मुरारी एवं जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने सुनवाई 24 अप्रैल तक स्थगित कर दी है।
तय है कि रोक के यह आदेश जारी रहेंगे। जस्टिस अमोल रतन सिंह के समक्ष सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि शहर के बड़े अधिकारी भी इन आदेशों को लागू करने के लिए तैयार नजर नहीं आ रहे हैं वहीं उन्होंने पंचकूला और मोहाली में बिगड़ते ट्रैफिक हालातों पर कहा कि यहां तो ट्रैफिक के टी अक्षर से भी लगता है कि लोग अनजान हैं। लिहाजा हाईकोर्ट ने इस मामले में सहयोग दे रहे एमाइकस क्यूरे से मामले की अगली सुनवाई पर जानकारी दिए जाने के आदेश दिए हैं।
पंचकूला में लगे 379 सीसीटीवी कैमरे
पंचकूला के डीसी ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया कि शहर की सड़कों के महत्वपूर्ण प्वाइंट्स पर अब तक 379 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं हाईकोर्ट के आदेशों के तहत अब तक निगम ने फुटपाथ, सड़कों के किनारे और पार्किंग एरिया जैसी कई जगहों से अवैध अतिक्रमण हटा दिए हैं और यह कार्यवाही जारी है।