मास्टर प्लान में अपार्टमेंट के प्रावधान के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को जमकर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारी अपना काम करने के स्थान पर हर काम के लिए हाईकोर्ट के कंधे का इस्तेमाल करना चाहते हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी ऐसी प्रवृत्ति छोड़ अपना काम खुद और सही ढंग से करें। साथ ही हाईकोर्ट ने अपार्टमेंट को लेकर अगली सुनवाई से पहले फैसला लेने के आदेश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान याची पक्ष ने कहा कि प्रशासन एक प्लाट को प्रतिशत के अनुसार रजिस्टर कर सकता है लेकिन फ्लोर के अनुसार रजिस्टर करने का कोई प्रावधान नहीं है। इस पर सीनियर एडवोकेट विकास बहल ने हाईकोर्ट को बताया कि मास्टर-प्लान में एक प्लाट को तीन फ्लोर्स में विभाजित किए जाने का प्रावधान है।
इस मामले को लेकर सेक्टर-10 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से उसके सचिव और अन्य सदस्यों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया है की पिछले कुछ साल से रिहायशी प्लॉट्स का अवैध तरीके से निर्माण कर उन्हें अपार्टमेंट्स के तौर पर आगे बेचा जा रहा है। अगर अपार्टमेंट के प्रावधान को मंजूरी दी गई है तो इससे शहर के इन्फ्रास्ट्रक्चर बोझ काफी बढ़ जाएगा। ऐसे में इन जगहों पर अधिक वाहन और उनके लिए पार्किंग स्पेस की समस्या खड़ी हो जाएगी और ऐसा होना शुरू भी हो गया है।