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कड़ी फटकार- हर काम के लिए हाईकोर्ट का कंधा इस्तेमाल करने का काम बंद कर दें अधिकारी

Tue, 28 May 2019 10:46 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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मास्टर प्लान में अपार्टमेंट के प्रावधान के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को जमकर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारी अपना काम करने के स्थान पर हर काम के लिए हाईकोर्ट के कंधे का इस्तेमाल करना चाहते हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी ऐसी प्रवृत्ति छोड़ अपना काम खुद और सही ढंग से करें। साथ ही हाईकोर्ट ने अपार्टमेंट को लेकर अगली सुनवाई से पहले फैसला लेने के आदेश दिए हैं।
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सुनवाई के दौरान याची पक्ष ने कहा कि प्रशासन एक प्लाट को प्रतिशत के अनुसार रजिस्टर कर सकता है लेकिन फ्लोर के अनुसार रजिस्टर करने का कोई प्रावधान नहीं है। इस पर सीनियर एडवोकेट विकास बहल ने हाईकोर्ट को बताया कि मास्टर-प्लान में एक प्लाट को तीन फ्लोर्स में विभाजित किए जाने का प्रावधान है।

इस मामले को लेकर सेक्टर-10 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से उसके सचिव और अन्य सदस्यों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया है की पिछले कुछ साल से रिहायशी प्लॉट्स का अवैध तरीके से निर्माण कर उन्हें अपार्टमेंट्स के तौर पर आगे बेचा जा रहा है। अगर अपार्टमेंट के प्रावधान को मंजूरी दी गई है तो इससे शहर के इन्फ्रास्ट्रक्चर बोझ काफी बढ़ जाएगा। ऐसे में इन जगहों पर अधिक वाहन और उनके लिए पार्किंग स्पेस की समस्या खड़ी हो जाएगी और ऐसा होना शुरू भी हो गया है।
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याचिका में बताया गया है की प्रशासन ने वर्ष 2001 में अपार्टमेंट एक्ट बनाया था, लेकिन इसके खिलाफ शहर वासियों द्वारा किये गए विरोध के बाद वर्ष 2007 में इसे वापस ले लिया गया था। लोग नहीं चाहते थे कि शहर के खूबसूरत बंगलो को अपार्टमेंट में बदल कर उसका सौंदर्य बर्बाद कर दिया जाए।

जो प्लॉट्स एक परिवार के लिए बनाए जाने थे, उन्हें अब अपार्टमेंट्स में तब्दील किए जाने से बड़ी परेशानी खड़ी हो रही है। इस पर बहल ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की प्रॉपर्टी है और उसे पैसे की जरूरत पड़ती है तो उसका हिस्सा बेचने से उसे रोका नहीं जा सकता।

इस दौरान प्रशासन की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट लिखित में आदेश दे, जिससे काम आसान हो जाए। हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि यह प्रशासन का काम है जो उन्हें करना चाहिए। हर काम के लिए हाईकोर्ट के आदेश की जरूरत बताई जाती है और हाईकोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर चलाई जाती है। हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारी ऐसी प्रवृत्ति छोड़ अपना काम खुद और सही प्रकार से करें।

 
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