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बिना जांच के कुक को निकाला, हिम्मत है तो ऐसे चीफ सेक्रेटरी को निकाल कर दिखाओ: हाईकोर्ट

Tue, 11 Dec 2018 12:56 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
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स्कूल में कुक तैनात महिला कर्मी को सेवाओं में बहाल करने के सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ हरियाणा सरकार की अपील पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि कुक पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे बर्खास्त किया गया, लेकिन यह करते हुए अधिकारी क्यों भूल गए कि आरोपों की जांच करना जरूरी है। चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों पर कार्रवाई करते हुए नियम कायदे क्यों भूल जाते हैं अधिकारी। कोर्ट ने कहा कि अगर इतनी ही हिम्मत है तो चीफ सेक्रेटरी को इस प्रकार निकाल कर दिखाओ, तब पता चल जाएगा कि कानून क्या होता है।
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हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को एक सप्ताह की मोहलत देते हुए इस पर उनका पक्ष रखने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर जवाब से कोर्ट संतुष्ट नहीं हुए तो भारी जुर्माने के लिए हरियाणा सरकार तैयार रहे। महिला कुक को यमुनानगर के एक स्कूल में जुलाई 2004 में नौकरी पर रखा गया था। इसके बाद अचानक ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पास कर उसे बर्खास्त करने का निर्णय ले लिया। इसके खिलाफ उसने लेबर कोर्ट में अपील की। लेबर कोर्ट ने महिला के खिलाफ फैसला सुनाया, जिसे चुनौती देते हुए उसने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की।

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने लेबर कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि बिना जांच ऐसे किसी कर्मचारी को नहीं निकाला जा सकता और याची को बहाल करने के आदेश जारी कर दिए। इस आदेश के खिलाफ हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील की। डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार से पूछा कि आखिर उन्होंने अपील क्यों दाखिल की है, जबकि स्कूल केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई राशि से चलाया जाता है। इसके लिए हरियाणा सरकार ने दलील दी, लेकिन कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर पाए। इसी बीच कहा गया कि यह इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट नहीं है।
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ऐेसे में कर्मी को वर्कमैन नहीं माना जा सकता। इस दलील को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कई मामलों में आदेश जारी कर चुका है कि यूनिवर्सिटी के कर्मचारी भी वर्कमैन की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में स्कूल के कर्मचारियों को भी इस परिभाषा से बाहर नहीं रखा जा सकता। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को एक सप्ताह की मोहलत देते हुए कहा कि अगर याचिका दाखिल करने का संतोषजनक कारण नहीं बताया गया तो हरियाणा सरकार भारी जुर्माने के लिए तैयार रहे।
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