हत्या के मामले में अतिरिक्त आरोपियों के तौर पर कुछ लोगों को शामिल करने से जुड़ी याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों में अतिरिक्त आरोपी बनाने की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट को ऐसे मामलों में नियमों के प्रति सख्त रहना चाहिए, ताकि ऐसी प्रवृत्ति को रोका जा सके।
मामला महेंद्रगढ़ से जुड़ा है, जहां 2018 में हुई हत्या के एक मामले में शिकायतकर्ता ने कुछ लोगों को अतिरिक्त आरोपी के तौर पर समन किए जाने की अपील की थी। ट्रायल कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ ममता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
हाईकोर्ट ने याची का पक्ष सुनने के बाद याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में 11 लोग पहले ही ट्रायल झेल रहे हैं। एफआईआर में और उसके बाद सप्लीमेंट्री बयान में भी याची ने उन लोगों का नाम नहीं लिया था जिनको अब अतिरिक्त आरोपी बनाने की अपील की जा रही है। जब दूसरा सप्लीमेंट्री बयान हुआ तब जाकर इन लोगों का नाम लिया गया है।
कानून के प्रावधान के तहत कोर्ट पास अधिकार है कि वह किसी को अतिरिक्त आरोपी बनाकर समन कर सकता है, लेकिन ऐसा करते हुए नियमों के प्रति जज को सख्त रहना चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों में अब यह प्रवृत्ति बन गई है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों का नाम शामिल किया जाए और ज्यादा लोग ट्रायल झेलें।