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हाईकोर्ट की टिप्पणी- अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्ति को पुलिस-सेना की वर्दी पहनने का अधिकार नहीं

Wed, 04 Mar 2020 09:56 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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पुलिस भर्ती को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा कि अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को पुलिस और सेना की वर्दी पहनने का अधिकार नहीं है। पुलिस की ड्यूटी पब्लिक डीलिंग का काम, कोई नहीं चाहेगा कि पुलिस कर्मी अपराधी प्रवृत्ति का व्यक्ति हो। कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ ही याचिका पर सुनवाई बिना कोई राहत दिए स्थगित कर दी।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा पुलिस भर्ती के नियम को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया कि भर्ती नियम के अनुसार यदि किसी पर एफआईआर दर्ज है और उसके खिलाफ चार्जशीट पेश की जा चुकी है तो उसे भर्ती के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाता है।

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया कि उन्होंने भर्ती के लिए आवेदन किया था और इस दौरान उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई। चार्जशीट के कारण उन्हें भर्ती के लिए अयोग्य करार दे दिया गया। भर्ती का नतीजा आने से पहले ही उन्हें अदालत ने उस केस में बरी कर दिया, लेकिन सरकार ने नियुक्ति देने से इनकार कर दिया। याची ने कहा कि ऐसा करना सीधे तौर पर अन्याय है।
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कैसे ट्रायल का नतीजा आने तक रिक्त रखे जा सकते हैं पद

इस पर हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि कैसे किसी भर्ती में कुछ पदों को ट्रायल का नतीजा आने तक रिक्त रखा जा सकता है और वह भी तक जब बरी होने की गारंटी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि वैसे भी अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्तियों को सेना और पुलिस की वर्दी पहनने का अधिकार नहीं है।

सेना और पुलिस के कंघे पर बहुत अहम जिम्मेदारी होती है। इस पर याचिकाकर्ताओं ने कहा कि नियम के अनुसार जिस अपराध की सजा 3 साल से अधिक है, उसमें यदि किसी व्यक्ति को चार्जशीट हो जाए तो वह हमेशा के लिए नौकरी के लिए अयोग्य हो जाता है। कोर्ट ने दलीलों को नकारते हुए याचिकाकर्ताओं को बिना कोई राहत दिए सुनवाई स्थगित कर दी।
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