एयरपोर्ट के निकट अतिक्रमण, अप्रोच रोड और ड्रेनेज संबंधी जिम्मेदारी अधिकारियों द्वारा एक दूसरे पर डालने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सभी को जमकर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो भी अधिकारी जनहित के काम में बाधक बनेगा, उसे हम जेल की हवा खिलाने से गुरेज नहीं करेंगे। हाईकोर्ट ने कहा कि यह सभी विभाग पंजाब सरकार के अधीन हैं, लिहाजा पंजाब के एडवोकेट जनरल (एजी) ही अब इसका हल निकालें। साथ ही हाईकोर्ट ने मोहाली के डीसी और पंजाब के एविएशन सचिव को तलब कर लिया है।
चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी एवं जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को सुनवाई शुरू होते ही हाईकोर्ट ने लंबित कार्यों के बारे में जानकारी मांगी। इस पर केंद्र सरकार ने बताया कि जुलाई में मानसून आरंभ हो जाएगा और अभी तक एयरपोर्ट पर जलभराव की समस्या का समाधान करने की दिशा में कोई काम नहीं किया गया है। अगर ऐसा ही रहा तो बारिश में एयरपोर्ट बंद करने के हालात पैदा हो जाएंगे। हाईकोर्ट ने जीरकपुर नगर परिषद से जवाब मांगा तो उन्होंने कहा कि ड्रेनेज का काम ड्रेनेज विभाग का है।
जब ड्रेनेज विभाग से पूछा तो उन्होंने कहा कि सभी ड्राइंग बनाकर नगर परिषद को दे दी गई हैं और अब नगर परिषद ही कार्रवाई करेगा। इसी तरह एयरपोर्ट के पास अवैध निर्माण और अप्रोच रोड पर भी नगर परिषद और गमाडा एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराते रहे। चीफ जस्टिस ने इस पर सभी को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि जब हाईकोर्ट की निगरानी में अधिकारियों का यह हाल है तो जिन आम लोगों का इनसे सामना होता है, उनका तो भगवान ही मालिक है।
हाईकोर्ट ने गमाडा, नगर परिषद और ड्रेनेज विभाग को आखिरी मौका देते हुए अगली सुनवाई से पहले आपस में बैठक कर हल निकालने के आदेश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट कर दिया है कि यदि हल नहीं निकला तो मुख्य सचिव को तलब कर लिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने इन्हें सौंपी थी जिम्मेदारी
केंद्र सरकार ने बताया कि एयरपोर्ट में जलभराव की समस्या को ठीक करने की जिम्मेदारी हाईकोर्ट ने ही जीरकपुर नगर परिषद को दी थी। अप्रोच रोड के लिए मोहाली के डीसी को निर्देश दिए गए थे और अवैध निर्माणों पर गमाडा को कार्रवाई करनी थी। केंद्र ने बताया कि इनमें से अभी तक एक काम भी नहीं किया गया गया है।