नाबालिगों को नशा परोसने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब के डीजपी से कहा कि ऐसा करने वालों को कुचल दिया जाना चाहिए। उनको बख्शा न जाए और कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो। नाबालिगों को शराब परोसने वाले होटल, रेस्टोरेंट और बार आदि को एक्साइज विभाग सील करे। हाईकोर्ट द्वारा ड्रग मामले में संज्ञान लेकर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पंजाब के सभी डी-एडिक्शन सेंटरों को तीन महीने में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट- 2010 और मेंटल हेल्थकेयर एक्ट-2017 के तहत रजिस्टर करने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों कानूनों के तहत इलाज के लिए सुविधा दी जाए। फिलहाल राज्य के सभी डी-एडिक्शन सेंटर एनडीपीएस एक्ट के तहत चल रहे हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो सभी सेंटरों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। सुनवाई के दौरान पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता और ड्रग रैकेट के मामलों की जांच कर रही एसटीएफ के मुखिया एचएस सिद्धू भी मौजूद रहे।
सेंटर पर आने वाले कैदी नहीं मरीज
सुनवाई के दौरान डा. आदित्य कौशिक ने हाईकोर्ट को बताया कि राज्य के डी-एडिक्शन केंद्र एनडीपीएस एक्ट के तहत चलाए जाते हैं जिसके तहत रोगियों को मेडिकल प्रोटोकॉल में रखा जाता है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि डी-एडिक्शन केंद्रों में इलाज करवाने वाले कैदी नहीं हैं बल्कि वे मरीज हैं। उनका एक रोगी की तरह इलाज किया जाना चाहिए जो एनडीपीएस एक्ट सुनिश्चित नहीं करता बल्कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट- 2010 और मेंटल हेल्थकेयर एक्ट-2017 सुनिश्चित करते हैं। लिहाजा सरकार इन दोनों एक्ट के तहत नियम तय करे और डी-एडिक्शन केंद्रों को रजिस्टर करे।