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अधिकारियों को पीजीआई ले जाकर एसिड अटैक पीड़ितों से मिलवाएं, क्या तब समझेंगे दर्द: हाईकोर्ट

Sat, 07 Dec 2019 10:39 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक फोटो
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा तेजाब की बिक्री पर जारी दिशा निर्देशों के बावजूद इसकी सरेआम बिक्री पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और यूटी प्रशासन को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि तीनों के आला अधिकारियों को तलब कर पीजीआई ले जाकर पीड़ितों से मिलवाएं, क्या तब अधिकारी उनका दर्द समझेंगे।
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हाईकोर्ट ने अब अगली सुनवाई पर तीनों के गृह विभाग के संयुक्त सचिव को हाईकोर्ट में हाजिर रहने का आदेश दिया है। फरीदाबाद की अरुणा त्रिपाठी पर 13 साल पहले हुए एसिड अटैक की सीबीआई जांच और उचित मुआवजे की मांग को लेकर हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र ने हाईकोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब की बिक्री के बारे कुछ दिशा-निर्देश जारी किए थे।

इसके बावजूद हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ में तेजाब खुले आम बिक रहा है। अधिकारी इस मामले में गंभीर नहीं हैं। इस पर हरियाणा गृह विभाग के सचिव ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेजाब की खरीद व बिक्री के लिए जारी किए गए नियम की कोर्ट को जानकारी दी।
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हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि लगता है उनको हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ के आला अधिकारियों को तलब कर एक बार पीजीआई ले जाकर तेजाब हमले की पीड़िताओं से मिलाया जाए। तब उन्हें पता चलेगा कि एसिड अटैक विक्टिम की क्या जिंदगी होती है।

तेजाब खुले आम बिकता रहेगा तो एसिड अटैक के मामले कैसे रोक सकते हैं

सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने बताया कि उन्होंने एसिड अटैक पीड़ितों को मुआवजे की नीति लागू कर दी है। वहीं पंजाब सरकार ने बताया कि वह तो पहले ही यह नीति लागू कर चुका है। मामले में हाईकोर्ट को सहयोग दे रहे एडवोकेट रवि कमल गुप्ता ने कहा कि महज मुआवजा दिया जाना ही काफी नहीं है। इस कानून के तहत राज्य सरकारों को अपने जिलों के प्रत्येक दुकानदार का यह हिसाब भी रखना था कि किस दुकान से कितना तेजाब बिक रहा है।

पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में ऐसा कोई हिसाब ही नहीं रखा जा रहा है। इस पर जब जस्टिस गुप्ता ने दोनों राज्यों और चंडीगढ़ से जवाब मांगा तो वे कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि तेजाब खुले आम बाजारों में बिकता रहेगा तो एसिड अटैक के मामलों को कैसे रोका जा सकता है। जब तेजाब की खरीद और बिक्री का हिसाब रखा जाना तय है तो इस पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।

हाईकोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर भी उठाए थे सवाल
इससे पहले हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस की भूमिका और जांच पर भी सवाल खड़े किए थे। हाईकोर्ट ने कहा था कि जिस प्रकार की जांच की गई है, उससे यह पता चलता है कि पुलिस ऐसे मामलों में कितनी गंभीर है। कोर्ट ने कहा था कि हमारे पास आंकड़े मौजूद हैं कि किस प्रकार ऐसे मामलों में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल कर दी जाती है।
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यह था मामला

फरीदाबाद निवासी अरुणा त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि 2006 में वह अपने कुछ परिचितों के साथ ऑटो में जा रही थी। इस दौरान कुछ युवकों ने उसके ऊपर एसिड डाल दिया। एसिड अटैक से वह बुरी तरह झुलस गई थी। इसके बाद हरियाणा सरकार ने एसिड अटैक पीड़ितों को राहत देने के लिए एक नीति बनाई थी। इस नीति के तहत पीड़ित को तीन लाख रुपये देने का प्रावधान है। इसके लिए याची ने भी आवेदन किया था लेकिन हरियाणा सरकार की ओर से पूरी राशि न देते हुए केवल डेढ़ लाख रुपये जारी किए गए।
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