मृतक की आश्रित द्वारा दाखिल याचिका को मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा तकनीकी आधार पर खारिज करने पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि अदालतें तकनीकी कारणों के कारण न्याय का गला न घोटें। कल्याणकारी कानून का लाभ देते हुए लकीर का फकीर बनने की जरूरत नहीं है बल्कि जब तक बहुत ही जरूरी न हो तब तक तकनीकी कारणों से याचिका को खारिज करने से बचना चाहिए।
याचिका दाखिल करते हुए चंडीगढ़ निवासी मोनी सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि उसके पति एक दुकान पर हेड कुक का काम करते थे। 2009 में उनको एक गाड़ी ने सेक्टर 16 स्टेडियम के पास टक्कर मार दी थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।