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सराहनीय फैसला: चंडीगढ़ के प्राइमरी और मिडिल स्कूल के बच्चों को अब लंच से पहले मिलेगा ब्रेकफास्ट

Fri, 07 Jun 2019 02:26 PM IST
खुशबू गोयल रिशु राज सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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चंडीगढ़ के सभी सरकारी स्कूलों में पहली से 8वीं कक्षा तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब मिड डे मील से पहले ब्रेकफास्ट भी मिलेगा। ब्रेकफास्ट में प्राइमरी और मिडिल स्कूल के बच्चों को दूध, अंडा और केला देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए शिक्षा विभाग के पास साढ़े पांच करोड़ का बजट भी आ गया है। इसके लिए विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है।
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जून के महीने में ही टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। लोकसभा चुनाव के चलते प्रक्रिया में हुई देरी के बाद इस योजना को अगस्त-सितंबर महीने सेे लागू कर दिया जाएगा। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी-2019 से अलग यह पहल यूटी शिक्षा विभाग अपने स्तर पर कर रहा है। पिछले कई महीनों से फाइल फाइनेंस डिपार्टमेंट के पास थी, लेकिन अब विभाग के पास बजट पहुंच गया है।

शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को काफी सराहा जा रहा है। स्कूली बच्चों को दूध रोजाना दिया जाएगा, जबकि उनके पसंद के अनुसार अंडा और केले में से एक ब्रेकफास्ट में दिया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस योजना से सरकारी स्कूलों में छोटे बच्चों की उपस्थिति और भी बढ़ेगी।
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अभी सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों को मिड डे मील में दोपहर का भोजन दिया जाता है। इसमें स्कूलों ने दिन के हिसाब से अलग-अलग मेन्यू बनाया हुआ है। आमतौर पर दाल चावल, चना चावल, चपाती सब्जी इत्यादि दी जाती है। विशेष मौकों पर अनेक स्कूल अपनी ओर से कई बार मटर पनीर इत्यादि भी परोस देते हैं।

रोजाना 45 हजार बच्चों के लिए तैयार होगा ब्रेकफास्ट

ऑफिशियल आकड़ों की मानें तो चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले 45 हजार बच्चों के लिए रोजाना ब्रेकफास्ट तैयार किया जाएगा। इनमें 27 हजार प्राइमरी और 18 हजार अपर प्राइमरी के बच्चे रहेंगे। शिक्षा विभाग के पास मिड डे मिल और ब्रेकफास्ट मुहैया कराने के लिए कुल 12 करोड़ का फंड आया है। इनमें से साढ़े 5 करोड़ दूध, अंडा और केला की व्यवस्था में खर्च किया जाएगा। बच्चों को ब्रेकफास्ट मिड डे मिल से पहले दिया जाएगा।

...इसलिए ब्रेकफास्ट योजना लागू करने में हुई देरी
सरकारी स्कूल में ब्रेकफास्ट योजना को लागू होने में हो रही देरी का एक बड़ा कारण दूध, अंडा और केला का गवर्नमेंट ई मार्केट प्लेस (जेम) पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होना भी है। इसके लिए शिक्षा विभाग को अलग से मंजूरी लेनी है, जिसकी प्रक्रिया भी जारी है। दरअसल, विभागों द्वारा उपकरणों और सामान की खरीद में भ्रष्टाचार और जमाखोरी रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा जेम पोर्टल की व्यवस्था शुरूकी है।

बच्चों के रोजाना न्यूट्रिशन के लिए यह है मापदंड
नियमानुसार प्राइमरी के बच्चों को 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन, जबकि छठी से आठवीं कक्षा के बच्चों को 700 ग्राम कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन दिया जाना चाहिए। देश के कई राज्यों में सर्वे कराया गया, जिसमें यह बात सामने आई कि बच्चों को तय मात्रा से कम मुहैया कराया जा रहा है। अंडे, दूध व केला का ब्रेकफास्ट इसमें काफी सहायक साबित होगा।

जानें... अन्य देशों में क्या दिया जाता है बच्चों को

1. जापान : भरपूर मात्रा में दी जाती हैं ताजी हरी सब्जियां
जापान में बच्चों के दोपहर के खाने में ताजी और हरी सब्जियां ज्यादा मात्रा में दी जाती हैं। विकसित देशों की तरह यहां स्कूलों में वेंडिंग मशीन नहीं होतीं। अधिकतर स्कूलों में बच्चों को खाना परोसा जाता है और आमतौर पर बच्चे घर से खाना नहीं लाते हैं। यहां खाने में चावल, मछली, सूप और छोटे बच्चों के लिए दूध भी होता है।

2. अमेरिका : बच्चों के लिए चलाए जाते हैं न्यूट्रीशन प्रोग्राम
अमेरिका में बच्चों के खानपान को ध्यान में रखकर चाइल्ड न्यूट्रीशन प्रोग्राम चलाए जाते हैं। इसमें ब्रेकफास्ट, लंच और समर सर्विस फूड प्रोग्राम शामिल है। सॉलिड फैट, सोडियम और शुगर वाली चीजें जैसे जूस व मीट, ब्रेड आदि को खाने में मुख्य रूप से शामिल किया जाता है। इसके अलावा ज्यादा फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट्स खाने में न के बराबर होते हैं।

3. ब्रिटेन : बच्चों को लंच में दूध जरूरी
ब्रिटेन में बच्चे दोपहर का खाना घर से लेकर आते हैं। कुछ स्कूलों में खाना मिलने की सुविधा भी है। यहां प्राइमरी लेवल पर हर स्कूल में बच्चों को लंच में दूध अनिवार्य रूप से दिया जाता है। इसके अलावा यहां खाने में ज्यादातर मौसमी सब्जियों का उपयोग होता है। पॉल्ट्री (अंडा आदि) और सी-फूड प्रोडक्ट्स भी भरपूर मात्रा में खिलाए जाते हैं।
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4. दक्षिण कोरिया : बच्चों को स्कूल में मिलता है लंच
साउथ कोरिया में दोपहर का खाना बच्चों को स्कूल से ही दिए जाने का प्रावधान है। खाने में मुख्य रूप से चावल होता है और उसके साथ हरी सब्जियां व मांस, कच्ची गाजर, टमाटर आदि को विशेष रूप से परोसा जाता है। इनके खाने में खिमची, नामूल, बीबिमबैप जैसी पारंपरिक डिश शामिल हैं, जो हरी सब्जियों से ही बनाई जाती हैं।

तेजी से चल रहा है काम
बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए मिड डे मिल से पहले दूध, केला और अंडा देने की योजना है। विभाग को फंड की मंजूरी भी मिल गई है। लोकसभा चुनाव की वजह से टेंडर जारी नहीं हो पाया था, लेकिन अब इस पर काफी तेजी से काम चल रहा है।
- रुबिंदरजीत सिंह बराड़, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन, चंडीगढ़ (यूटी)
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