फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh: आरोपी की जमानत रद्द करने का आदेश खारिज, हाईकोर्ट ने कहा-दोषी सिद्ध होने तक जेल में रखना सजा

Tue, 29 Nov 2022 05:26 PM IST
निवेदिता वर्मा विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट ने कहा कि जीवन ईश्वर का दिया नायाब तोहफा है। निजी दुश्मनी, क्रूरता और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से उसे बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता है। गिरफ्तारी एक परिवार से अक्सर उसकी आजीविका का साधन छीन लेती है और कभी न मिटने वाला कलंक दे देती है।
विज्ञापन
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या और नशा तस्करी के एक आरोपी की जमानत रद्द करने के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि हमारे देश में आरोपियों के दोषी साबित होने की दर बेहद कम है। ऐसे में दोष सिद्ध होने से पहले की हिरासत सजा की तरह होती है। देश में ऐसा कोई तंत्र नहीं है जिससे निर्दोष साबित होने पर आरोपी व उसके परिवार को हुई क्षति की प्रतिपूर्ति की जा सके।

विज्ञापन


याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना निवासी आरोपी हरिंदर सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि हत्या और एनडीपीएस के मामले में उसके खिलाफ 2017 में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस वर्ष मई में उसे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। लुधियाना की ट्रायल कोर्ट में पेशी के दौरान मौजूद न रहने के चलते उसके खिलाफ अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिए। याची ने कहा कि वह अगली सुनवाई पर ट्रायल कोर्ट में हाजिर होने को तैयार है। 

हाईकोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि जीवन ईश्वर का दिया नायाब तोहफा है। निजी दुश्मनी, क्रूरता और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से उसे बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता है। गिरफ्तारी एक परिवार से अक्सर उसकी आजीविका का साधन छीन लेती है और कभी न मिटने वाला कलंक दे देती है। हमारे पास कोई ऐसा तंत्र मौजूद नहीं है जिससे आरोपी के निर्दोष साबित होने पर उसके व उसके परिवार के सदस्यों का मूल्यवान समय, ऊर्जा, आजीविका कमाने वाले की भरपाई की जा सके। दोषी करार देने से पहले कैद रखना एक तरह से सजा ही है। गिरफ्तारी व्यक्ति को उसके मौलिक अधिकार से वंचित करती है, आदतन अपराधी इसका अपवाद है। ऐसे में हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा उसके खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट के आदेश को रद्द कर दिया है। लुधियाना कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए हाईकोर्ट ने हरिंदर सिंह पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए उसे ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें