एक पूर्व चीफ ज्युडीशियल मजिस्ट्रेट की पत्नी को अनुकंपा के आधार पर हाईकोर्ट में वरिष्ठ सहायक का पद दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस रामेश्वर सिंह मलिक ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट, इसके रजिस्ट्रार (प्रशासन) और वरिष्ठ सहायक अंकिता मौर्या को 6 दिसंबर के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
हाईकोर्ट कर्मचारी एसोसिएशन और एक जूनियर सहायक विनोद धातरवाल की ओर से दायर की गई याचिका में अनुकंपा आधार पर नियुक्त की गईं वरिष्ठ सहायक की नियुक्ति रद करने की मांग करते हुए कहा गया है कि इस पद पर अनुकंपा के आधार पर कोई नियुक्ति किया जाना गैरकानूनी है।
याचिका में कहा गया है कि पंजाब सरकार ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियों को लेकर जो पालिसी तैयार की थी, हाईकोर्ट ने उसे ही लागू किया है। इस पालिसी में साफ कहा गया है कि अनुकंपा के आधार पर केवल ग्रुप सी और डी के पदों पर ही नियुक्तियां की जा सकती हैं, लेकिन पूर्व चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट डॉ. अतुल मौर्या की पत्नी अंकिता मौर्या को वरिष्ठ सहायक लगाया गया है, जोकि ग्रुप बी का पद है। इस तरह इस नियुक्ति में पालिसी के नियमों का उल्लंघन किया गया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि हाईकोर्ट जज कमेटी ने अंकिता मौर्या को वरिष्ठ सहायक नियुक्त करने का फैसला लेते हुए सभी नियमों को ध्यान से नहीं देखा, क्योंकि नियमों के तहत केवल उम्र सीमा में छूट दी जा सकती है। किसी भी तरह की अन्य छूट अनुकंपा आधार पर नहीं दी जा सकती। वहीं, अंकिता को टाइप व अन्य कई तरह की छूट भी दी गई, जोकि गलत है।
याचिका में यह भी कहा गया कि यह पद डायरेक्ट भर्ती वाला भी नहीं है। वहीं, पूर्व चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट डॉ. अतुल मौर्या की मृत्यु पर उनकी विधवा को लाखों रुपये ग्रेच्युटी व अन्य भत्ते भी दिए गए थे। इसके अलावा उन्हें 48010 रुपये फेमिली पेंशन भी मिल रही है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से आग्रह किया कि वह इस नियुक्ति को रद करे।