पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने शहर के बदतर होते हालात पर यूटी प्रशासन और एमसी के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि लावारिस कुत्ते लोगों के लिए परेशानी बने हैं, बारिश में सड़क के गड्ढे तालाब नजर आने लगे हैं और अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। लावारिस कुत्तों को अधिकारियों के घर बांध देना चाहिए ताकि जब दिन रात ये भौंकेंगे तब उनकी नींद खुलेगी।
सुनवाई आरंभ होते ही जस्टिस रावल ने कहा कि शहर की सड़कें हर साल टूट जाती हैं और फिर इसके लिए मोटा बजट मंजूर होता है। आखिर ये सड़कें किस मैटीरियल से बनाई जा रही हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जाए तो न जाने कितने अधिकारी फंसेंगे। कोर्ट ने कहा कि शहर में लगभग हर सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं।
प्रशासन और निगम के अधिकारियों के घरों के बाहर ऐसे गड्ढे किए जाएं और इसमें डेंगू के लारवा पनपें तो इन अधिकारियों को समझ आएगा कि उनकी ड्यूटी क्या है। शहर की हर सड़क पर गड्ढे हैं, रेहड़ी फड़ी वाले बढ़ते जा रहे हैं, लावारिस कुत्तों पर नियंत्रण नहीं है और अधिकारी हैं बस रिपोर्ट बनाने में लगे रहते हैं।
हर जानकारी इंटरनेट पर, अफसर जाते हैं जानकारी के लिए विदेश
हाईकोर्ट ने अब शहर की सड़कों के लिए इंजीनियरिंग विभाग और नगर निगम, रेहड़ी-फड़ी और आवारा कुत्तों के मामले में नगर निगम को ठोस कार्रवाई के आदेश दे दिए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि विदेशों में प्लास्टिक मैटीरियल का इस्तेमाल सड़क बनाने में होने लगा है। क्यों नहीं शहर में भी ऐसी सड़कें बनतीं जो हर मौसम को झेल सकें।
इससे प्लास्टिक वेस्ट की समस्या भी सुलझ जाएगी। कोर्ट ने कहा कि सुनने में आता है कि अधिकारी इस योजना की जानकारी के लिए विदेश गए हैं, उसके लिए विदेश गए हैं। जबकि आजकल हर जानकारी इंटरनेट पर है। उन्होंने कहा कि अब इन सभी मामलों में न तो उन्हें एक्शन टेकन रिपोर्ट चाहिए और न ही कार्रवाई की रिपोर्ट। अब खुद पता चलना चाहिए की शहर में काम हुआ है।