कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
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मोटर एक्सीडेंट क्लेम के मामले में 24 साल से लंबित यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। क्योंकि कंपनी ड्राइवर का लाइसेंस फर्जी साबित नहीं कर पाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि यह ड्राइवर की जिम्मेदारी नहीं है कि अपना लाइसेंस सही साबित करे बल्कि यह कंपनी की जिम्मेदारी है कि वह लाइसेंस को फर्जी साबित करे।
मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के सामने एक मामला पहुंचा था, जहां मुआवजे को लेकर याचिका दाखिल की गई थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की ओर से कहा गया था कि ड्राइवर का लाइसेंस फर्जी है जिस दलील को मानने से इनकार करते हुए ट्रिब्यूनल ने फैसला क्लेम दाखिल करने वालों के पक्ष में सुनाया था। बीमा कंपनी ने 1994 में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती दी थी।
याचिका में बताया गया था कि ड्राइवर ने लाइसेंस गुवाहाटी से बनवाया था और वहां की अथॉरिटी से जानकारी मिली है कि लाइसेंस जो ड्राइवर ने सौंपा था वह फर्जी है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या जो रिपोर्ट आई है उस पर जो हस्ताक्षर हैं उसे याचिकाकर्ता कंपनी के अधिकारी पहचानते हैं। साथ ही वेरिफिकेशन से जुडे अन्य सवाल हुए।
याचिका पर सुनवाई के दौरान इन सवालों के जवाब देने में नाकाम रहने पर हाईकोर्ट ने कंपनी की याचिका को खारिज कर दी। इस मामले में बीमा कंपनी ऐसा करने में नाकाम रही और ऐसे में हाईकोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल कुरुक्षेत्र के फैसले को सही करार देते हुए बीमा कंपनी की याचिका को खारिज कर दिया।