एक्सीडेंट की स्थिति में होने वाले इलाज के लिए भले ही मेडिक्लेम पॉलिसी से भुगतान हुआ है, लेकिन मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल की ओर से तय राशि का वाहन बीमा कंपनी को भुगतान करना ही होगा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह आदेश चंडीगढ़ निवासी मीनाक्षी मान के खिलाफ दाखिल बीमा कंपनी की याचिका को खारिज कर जारी किया है। वाहन बीमा कंपनी रॉयल सुंदरम जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल चंडीगढ़ के आदेश को चुनौती दी है।
कंपनी ने बताया कि मीनाक्षी अपने पति के साथ दोपहिया वाहन से 2014 में सेक्टर 47 से सेक्टर 35 आ रही थी। इसी बीच एक वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी, जिसमें दोनों गिर गए और उन्हें चोटें आईं। इनसे मीनाक्षी 25 प्रतिशत दिव्यांग हो गई। इसके लिए ट्रिब्यूनल ने उन्हें मुआवजे के रूप में 15,19,857 रुपये भुगतान करने का आदेश दिया था। कंपनी ने पहले दलील यह दी थी कि एक्सीडेंट के बाद उसका वेतन घट गया था और ऐसे में घटे हुए वेतन के अनुसार ही उसकी आय के नुकसान की गणना की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए मुआवजा राशि को सही करार दिया। इसके बाद कंपनी ने कहा कि पीड़ित को मेडिकल खर्च के तौर पर करीब 98 लाख रुपये भुगतान करने के ट्रिब्यूनल ने जो आदेश दिए हैं, वह दोषपूर्ण है। कंपनी ने दलील दी कि पीड़िता का मेडिकल इंश्योरेंस था और इसी के तहत उस बीमा कंपनी ने खर्च की राशि का भुगतान कर दिया। एक ही इलाज के दो अलग-अलग जगह से पैसे नहीं लिए जा सकते, इसलिए वाहन बीमा कंपनी को इस राशि के भुगतान से छूट दी जाए।
हाईकोर्ट ने कंपनी की दलील को खारिज करते हुए कहा कि मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत भले ही उसका भुगतान किया गया हो, लेकिन उस पॉलिसी से एक्सीडेंट का कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे में एक्सीडेंट की स्थिति में मेडिक्लेम का कानूनी प्रावधान ऊपर है और बीमा कंपनी को इसका भुगतान करना ही होगा।