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किसानों की आत्महत्या से जुड़ा शोध साझा करें विश्वविद्यालय, तभी निकलेगा समस्या का हल: हाईकोर्ट

Thu, 04 Jul 2019 02:35 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब में कर्ज में दबे किसानों की आत्महत्या को लेकर यूनिवर्सिटी के शोध को साझा करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक इस शोध को सांझा नहीं किया जाएगा, तब तक कैसे इस समस्या का हल निकल सकेगा। मूवमेंट अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए यह मुद्दा उठाया था। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने कहा था कि कर्जमाफी या आत्महत्या कर चुके किसानों के परिवारों को मुआवजा देना इस समस्या का हल नहीं है।
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अभी तक सरकार इस समस्या का कोई समाधान क्यों नहीं निकाल पाई है और आखिर क्यों ऐसे कदम नहीं उठाए जा सके, जिससे किसान आत्महत्या को मजबूर न हों। चीफ जस्टिस ने कहा था कि आत्महत्या कर चुके किसानों के परिवारों को मुआवजा देना एक अंतरिम राहत तो हो सकती है, लेकिन इसे समस्या का समाधान नहीं माना जा सकता है। जब तक इस समस्या की जड़ पर वार नहीं किया जाएगा सभी प्रयास नाकाफी साबित होंगे। हाईकोर्ट ने सरकार को तीन सप्ताह के भीतर इस समस्या के ठोस हल के साथ हाईकोर्ट में पेश हो इसकी जानकारी दिए जाने के आदेश दे दिए थे।

मामला जब सुनवाई के लिए पहुंचा तो बताया गया कि इस समस्या को लेकर यूनिवर्सिटी से शोध कराया गया था लेकिन इसे साझा नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि इस समस्या का एक ठोस समाधान निकाला जाना बेहद ही जरूरी है और जानना जरूरी है कि इसके पीछे के क्या कारण हैं। पंजाब में जीएनडीयू अमृतसर, पीएयू लुधियाना, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला और पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में अगर इस विषय पर कोई शोध है तो वह समस्या के हल में कारगर साबित हो सकता है। लिहाजा अब हाईकोर्ट ने इन यूनिवर्सिटी को शोध सांझा करने के आदेश दिए हैं।
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