धोखाधड़ी के मामले में भगोड़ा करार दिए गए याची को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पीजीआई में गरीबों के इलाज के लिए 1 लाख रुपये देने की शर्त पर जमानत देने के आदेश दिए हैं। निर्देश भी दिए गए हैं कि ट्रायल कोर्ट में केस की होने वाली प्रत्येक सुनवाई में याचिकाकर्ता पेश होना होगा।
धोखाधड़ी के आरोपी द्वारा जमानत रद्द करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याची आशीष पर 2014 में भिवानी के सिविल लाइंस थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। आरोपी को ट्रायल कोर्ट ने इस शर्त पर जमानत दी थी कि वह प्रत्येक सुनवाई पर अदालत में मौजूद रहेगा।
शर्त के बावजूद आरोपी 8 अगस्त 2017 को एक सुनवाई पर पेश नहीं हुआ तो ट्रायल कोर्ट ने उसे मिली जमानत जमानत को रद्द करते हुए अरेस्ट वारंट जारी कर दिए। इसके बावजूद भी आरोपी पेश नहीं हुआ तो उसे भगोड़ा करार दे दिया। ट्रायल कोर्ट के इसी आदेश को आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि आदेश पूरी तरह से गलत है क्योंकि आरोपी की ऐसी मंशा नहीं थी।
भगोड़ा करार दिए जाने के आदेशों को रद्द करते हुए उसे जमानत दिए जाने की आरोपी ने मांग की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रत्येक सुनवाई पर पेश होने के लिए आरोपी बाध्य है इसके बावजूद वह पेश नहीं हुआ लिहाजा उसे भगोड़ा करार दिए जाने का आदेश सही है।
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी को अब एक शर्त पर जमानत दी जा सकती है की वह एक लाख रुपये पीजीआई में आने वाले गरीब मरीजों के इलाज के लिए बनाए गए फंड में जमा करवाएगा और उसके बाद ट्रायल कोर्ट में होने वाली प्रत्येक सुनवाई पर पेश होगा।