डड्डूमाजरा गारबेज डंपिंग ग्राउंड में प्लांट और कचरे का निपटारे की शर्तों पर जेपी एसोसिएट्स और चंडीगढ़ प्रशासन में मतभेद के कारण वहां लगातार बढ़ते कूडे़ के ढेर पर हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। प्रशासन की ओर से एनजीटी के आदेश हाईकोर्ट में पेश किए गए थे, जिस पर कोर्ट ने कहा यह आदेश जेपी एसोसिएट्स के लिए हैं। अब कचरे के निपटारे से जुड़े विवाद पर हाईकोर्ट ने जेपी एसोसिएट्स से जवाब-तलब कर लिया है।
इससे पहले साइट के नजदीक रहने वाले लोगों की सेहत पर पड़ रहे बुरे प्रभाव की दलील देते हुए इसे डड्डूमाजरा से कहीं और शिफ्ट करने की अपील वाली याचिका पर यूटी प्रशासन ने बताया था कि साइट से कूड़ा हटाकर कंपनी इसे प्रोसेस कर रही है। हाईकोर्ट ने कूड़ा निपटाने में हो रही देरी और निपटारे की विधियों को लेकर जवाब मांगा था। इसके चलते प्रशासन ने हाईकोर्ट में एनजीटी के आदेश पेश कर दिए। प्रशासन और जेपी के बीच पहले कचरे का निपटारा करने के लिए प्रति टन कुछ अतिरिक्त फीस को लेकर विवाद चल रहा था।
प्रशासन द्वारा इसे भी मंजूर कर लिया गया, जिसके बाद गीला और सूखा कचरा अलग-अलग लाने की बात कही गई। इसको लेकर स्थिति स्पष्ट न होने के कारण भी कचरे का निपटारा करने में देरी हो रही है। कोर्ट के सामने यह तथ्य रखे गए तथा एनजीटी के आदेशों की प्रति सौंपी गई। हाईकोर्ट ने पाया था कि आदेश जेपी एसोसिएट्स को हुए हैं और हाईकोर्ट में लंबित इस याचिका में जेपी पार्टी ही नहीं थी। ऐसे में विवाद के निपटारे और जल्द से जल्द स्थान की सफाई के लिए हाईकोर्ट ने जेपी को प्रतिवादी बनाया था।
हाईकोर्ट के सामने आया था कि वर्तमान में जिस स्थान पर गारबेज डंपिंग साइट है, वहां पर आसपास के लोगों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इस सबके बारे में प्रशासन, नगर निगम हर कोई वाकिफ है, लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय निवासियों ने इस डंपिंग ग्राउंड को शिफ्ट कराने की कई कोशिश की, लेकिन इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई। बताया गया कि इस ग्राउंड की गंदगी के कारण आसपास के लोगों का रहना मुहाल हो गया है। यहां से बदबू उठती है ,जिससे लोग इसके नजदीक आने से भी कतराते हैं।
ग्राउंड से आने वाली बदबू को रोकने के लिए कोई उपाय भी नहीं किया गया है। इस डंपिंग साइट के कारण लोगों के बीमार होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे बच्चे सबसे ज्यादा बीमार हो रहे हैं।