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हाईकोर्ट का फरमान- खुले में कूड़ा फेंकने वालों पर इतना मोटा जुर्माना लगाओ कि लोग सुधर जाएं

Sat, 05 Oct 2019 09:55 AM IST
खुशबू गोयल विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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केंद्र सरकार द्वारा चालान की राशि बढ़ाने और प्रशासन द्वारा पॉलिथीन पर एक लाख जुर्माने के बाद अब चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा निवासी कूड़ा फेंकने पर मोटे जुर्माने के लिए तैयार हो जाएं। हाईकोर्ट ने तीनों को खुले मे कूड़ा डालने पर जुर्माना लगाने पर विचार करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि इतना मोटा जुर्माना लगाया जाए कि लोग सुधर जाएं।
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जुर्माना राशि अधिक होगी तो लोग खुले में कूड़ा नहीं डालेंगे। हाईकोर्ट ने कहा कि यूटी और दोनों राज्य यह सुनिश्चित करें कि हर दिन चाहे उस दिन छुट्टी ही क्यों न हो, सभी सड़कें, पार्क और सार्वजनिक स्थलों की सफाई की जाए। कहीं भी गंदगी नजर नहीं आनी चाहिए। इस साफ-सफाई के काम में लगे कर्मियों को इसके लिए सभी जरूरी सामान यूनिफार्म, जूते, दस्ताने और पहचान पत्र दिया जाए।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने प्रत्येक सफाईकर्मी को प्रत्येक वर्ष एक महीने का वेतन बोनस के तौर पर दिए जाने के आदेश दिया। हाईकोर्ट ने सरकार और प्रशासन को हर घर में गीले और सूखे कचरे के लिए दो अलग-अलग डस्टबिन दिए जाने पर गौर करने को कहा है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कर दिया है कि सभी शहर जीने के लायक बन सकें इसके लिए इन शहरों की सफाई के लिए संबंधित निगम आयुक्त, डीसी, ईओ इसके लिए जिम्मेदार बनाया है।
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तीन माह में रोकें डिफेसमेंट

हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ को आदेश दिया है कि वह तीन माह के भीतर डिफेसमेंट को रोकें। लोग जहां मन चाहे वहां पोस्टर और पैंफलेट चस्पां कर शहर की सूरत बिगाड़ने पर तुले हुए हैं। हाईकोर्ट ने विभिन्न नगर पालिका, नगर परिषद व नगर निगम को इसके लिए कड़े कानून और जुर्माने का प्रावधान करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों, इमारतों, दीवारों व अन्य स्थान पर ही नहीं, प्राइवेट प्रापर्टी पर भी ऐसा करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

बॉयोवेस्ट का सही निपटारा नहीं तो जिम्मेदार पर होगी अवमानना की कार्रवाई
हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि बॉयोवेस्ट को किसी भी स्तर पर अन्य प्रकार के कूड़े में न मिलने दिया जाए। इसका सही ट्रांसपोर्टेशन व निपटारा, इसे पैदा करने वाले संस्थान की ही जिम्मेदारी होगी। यदि इसमें किसी भी स्तर पर कोई कोताही की गई तो जिम्मेदार व्यक्ति को न्यायालय के आदेश की अवमानना का दोषी माना जाएगा।
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