पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बच्चों की कस्टडी मामले में मां के खिलाफ अहम फैसला सुनाया, और अब वह बच्चों से सिर्फ दो दिन के लिए मिल पाएगी। केस में आदेश सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि मां का बच्चों पर कानूनी अधिकार बच्चों की भलाई और उनकी इच्छा से ऊपर नहीं है।
हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी हिसार की फैमिली कोर्ट द्वारा सुनाए गए आदेश के खिलाफ बच्चों की मां की याचिका को खारिज करते हुए की है। याचिका दाखिल करते हुए महिला की ओर से बताया गया कि 2005 में उसका विवाह बेहद धूमधाम से हुआ था और पर्याप्त दहेज दिया गया था।
ससुराल वाले दहेज को नाकाफी मान शादी के बाद से ही उसे परेशान करने लगे थे और अक्सर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे। इसके बाद 2006 में उनकी पहली बेटी हुई, जिसके बाद अत्याचार और बढ़ गया। 2007 में जब वह दोबारा गर्भवती हुई तो लिंग जांच के लिए भी दबाव बनाया गया।